म्यूचुअल फंड पर टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आपने पैसा कहां लगाया है और उसे कितने समय तक अपने पास रखा है. आइए जानते हैं म्यूचुअल फंड पर टैक्सेशन के नियम.
1. इक्विटी म्यूचुअल फंड
ये वो फंड हैं जो 65% से ज्यादा पैसा शेयर बाजार में लगाते हैं.
- लॉन्ग टर्म (1 साल से ज्यादा): अगर आपका मुनाफा ₹1.25 लाख से ज्यादा है, तो उस पर 12.5% टैक्स लगेगा.
- शॉर्ट टर्म (1 साल या कम): मुनाफे पर सीधा 20% टैक्स देना होगा.
2. डेट म्यूचुअल फंड
इसमें टैक्स के नियम निवेश की तारीख पर निर्भर करते हैं:
- 1 अप्रैल 2023 के बाद का निवेश: आप इसे कितने भी समय रखें, मुनाफा आपकी कुल आय में जुड़ेगा और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा.
- 1 अप्रैल 2023 से पहले का निवेश: 2 साल से ज्यादा रखने पर 12.5% टैक्स लगेगा.
3. हाइब्रिड फंड
इसमें टैक्स इस आधार पर लगता है कि फंड में इक्विटी का हिस्सा कितना है:
- 65% से ज्यादा इक्विटी: इक्विटी फंड की तरह टैक्स लगेगा.
- 35% से कम इक्विटी: इसे ‘डेट फंड’ माना जाएगा और स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा.
- 35% से 65% के बीच: लॉन्ग टर्म मुनाफा 12.5% और शॉर्ट टर्म आपके टैक्स स्लैब के अनुसार.
4. टैक्स सेविंग फंड यानी ईएलएसएस
इसमें 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है, इसलिए इसमें ‘शॉर्ट टर्म’ जैसा कुछ नहीं होता. 3 साल बाद बेचने पर मुनाफा 1.25 लाख रुपये से ज्यादा होने पर 12.5% टैक्स लगेगा. पुरानी टैक्स व्यवस्था में इसमें 1.5 लाख रुपये तक की छूट भी मिलती है.
5. गोल्ड और विदेशी फंड
गोल्ड ईटीएफ और इंटरनेशनल फंड्स पर भी लॉन्ग टर्म मुनाफा 12.5% की दर से टैक्स किया जाएगा.
ध्यान देने वाली बातें
- म्यूचुअल फंड से डिविडेंड की आय- निवेशक की कुल आय में शामिल और स्लैब के अनुसार टैक्स.
- नॉन-रेसिडेंट और कंपनियों पर अलग दरें.
- टैक्स ट्रीटी बेनिफिट लागू हो सकता है.
क्यों अहम है फंड का टाइप और अवधि
- फंड की कैटेगरी और होल्डिंग पीरियड के हिसाब से एक ही निवेश पर टैक्स अलग-अलग हो सकता है,
- इक्विटी फंड लंबी अवधि में कम टैक्स देता है.
- डेट फंड (1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदा)- हमेशा स्लैब रेट पर टैक्स.
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