भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर फिलहाल हस्ताक्षर टल गए हैं. सरकार का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी नई वैश्विक टैरिफ व्यवस्था तय नहीं कर लेता, तब तक समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा. सूत्रों के अनुसार बातचीत जारी है और दोनों देशों की टीमें तकनीकी पहलुओं पर काम कर रही हैं. हालांकि भारत चाहता है कि नई टैरिफ संरचना स्पष्ट होने के बाद ही समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएं ताकि भारतीय निर्यातकों को नुकसान न हो.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाया था.
दरअसल हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद वहां की टैरिफ नीति में बड़ा बदलाव आया है. अदालत ने उस प्रावधान के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को रद्द कर दिया जिसके आधार पर ट्रंप प्रशासन ने कई देशों पर शुल्क बढ़ाए थे. इस फैसले के बाद अमेरिका को वैश्विक व्यापार के लिए नई टैरिफ व्यवस्था तैयार करनी पड़ रही है. इसी वजह से भारत फिलहाल समझौते के हस्ताक्षर को लेकर इंतजार की रणनीति अपना रहा है.
फिलहाल सभी देशों पर लगा है अस्थाई टैरिफ
अमेरिका ने अभी अस्थाई तौर पर 1974 के व्यापार कानून की एक धारा के तहत सभी देशों से आने वाले कुछ उत्पादों पर करीब दस प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है. यह व्यवस्था सीमित अवधि के लिए लागू की गई है और इसी दौरान नई वैश्विक टैरिफ संरचना तैयार की जा रही है. भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत ऐसा समझौता करना चाहता है जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति मिल सके.
समझौते की रूपरेखा लगभग तय
सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच समझौते का ढांचा सिद्धांत रूप में लगभग तय हो चुका है. अब दोनों देशों की टीमें केवल बारीक तकनीकी मुद्दों और नियमों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं. पहले भारत कुछ उत्पादों पर करीब 18 प्रतिशत तक रेसिप्रोकल टैरिफ के स्तर पर सहमत हुआ था, जिससे भारतीय निर्यातकों को कुछ अन्य देशों के मुकाबले फायदा मिल सकता था. हालांकि नई टैरिफ व्यवस्था आने के बाद इसमें बदलाव भी संभव है.
मलेशिया से अलग है भारत की स्थिति
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की स्थिति मलेशिया से अलग है. मलेशिया ने अमेरिका के साथ एक कानूनी व्यापार समझौता किया था, जिसे बाद में बदलती टैरिफ नीति के कारण वापस लेना पड़ा. भारत के मामले में अभी केवल ढांचा तय हुआ है और कोई औपचारिक कानूनी समझौता नहीं हुआ है. इसी वजह से भारत के पास अंतिम निर्णय लेने के लिए समय और लचीलापन दोनों मौजूद हैं.
अन्य मुद्दों पर भी जारी है बातचीत
भारत और अमेरिका के बीच बातचीत केवल टैरिफ तक सीमित नहीं है. कई गैर टैरिफ बाधाओं और विशेष क्षेत्रों पर लगाए गए शुल्क जैसे मुद्दों पर भी चर्चा जारी है. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत अमेरिका के साथ आपसी लाभ वाले व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगातार संपर्क में है और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है.
निर्यात पर भी नजर
सरकार का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे भू राजनीतिक तनाव का असर कुछ हद तक व्यापार पर पड़ सकता है. समुद्री मार्गों और हवाई माल ढुलाई में चुनौतियां आने की संभावना है, जिससे उस क्षेत्र के साथ आयात और निर्यात प्रभावित हो सकता है. इसके बावजूद सरकार को उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष में भारत का कुल माल और सेवाओं का निर्यात करीब 860 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. अगर किसी क्षेत्र में गिरावट आती है तो अन्य बाजारों में निर्यात बढ़ाकर उसकी भरपाई करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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