पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज से तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने के बीच भारत ने वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा तेल खरीदने की कोशिशें तेज कर दी हैं. भारतीय रिफाइनरियां अब अमेरिका, रूस, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से ज्यादा तेल लेने के लिए बातचीत कर रही हैं. सरकार के अनुसार देश के पास फिलहाल करीब 50 दिनों की मांग पूरी करने लायक कच्चे तेल का स्टॉक है, लेकिन बढ़ती वैश्विक कीमतों और शिपिंग लागत के कारण आयात बिल बढ़ने की आशंका है.
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है. फरवरी में इस सप्लाई का करीब आधा हिस्सा ‘ स्ट्रेट ऑफ होर्मूज’ से आया था, जो ईरान और ओमान के बीच एक अहम समुद्री रास्ता है. ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस रास्ते से टैंकरों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है. पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हम उन जगहों से ज्यादा तेल ले रहे हैं जो संघर्ष वाले इलाके से बाहर हैं. 2025 में गैर-होर्मुज स्रोतों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई है.” भारतीय रिफाइनरियां अब पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अमेरिका से तेल ले रही हैं.
रूस से भी आएगा तेल
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा रूसी तेल की बिक्री और डिलीवरी के लिए दी गई 30 दिन की छूट से एक नया रास्ता खुल गया है. इस छूट के तहत 5 मार्च तक जहाजों पर लदा रूसी तेल 5 अप्रैल तक बिना रोक-टोक भारत पहुंच सकता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड जैसी कंपनियों ने फिर से रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया है. मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि भारत की स्थिति मजबूत है और मौजूदा स्टॉक देश की 50 दिन की मांग को पूरा करने के लिए काफी है. उन्होंने कहा कि भारत के पास अभी करीब 14.4 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर में है और सबसे जरूरी बात यह है कि इस सप्लाई की लगातार भरपाई हो रही है. मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश के पास इसके अलावा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) और सरकारी तेल कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक मिलाकर कुल क्षमता लगभग 74 दिन के शुद्ध आयात के बराबर है. हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि नए स्रोतों से सप्लाई मिलने के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, ज्यादा माल भाड़े और बीमा प्रीमियम के कारण आयात बिल बढ़ सकता है.
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
28 फरवरी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) की कीमतें भी दोगुनी से ज्यादा बढ़कर 24-25 डॉलर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट तक पहुंच गई हैं. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और अपनी कुल जरूरतों का करीब आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से लेता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में ट्रैफिक रुकने से देश की सप्लाई चेन पर काफी दबाव पड़ा है.
अतिरिक्त गैस सप्लाई का वादा
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के बंद होने से पैदा हुए वैश्विक संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत अब कच्चे तेल के लिए केवल एक रास्ते पर निर्भर नहीं है; उसकी कुल तेल आपूर्ति का केवल 40% हिस्सा ही हॉर्मूज से गुजरता है, जबकि शेष 60% रूस, पश्चिम अफ्रीका और अमेरिका जैसे वैकल्पिक रास्तों से सुरक्षित आ रहा है. ऊर्जा संकट से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने भारत को अतिरिक्त गैस सप्लाई का प्रस्ताव दिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि नई दिल्ली ने रणनीतिक रूप से अपनी निर्भरता को कई हिस्सों में बांट दिया है ताकि किसी भी युद्ध या तनाव की स्थिति में देश में ईंधन की कमी न हो.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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