रिटायरमेंट की सही योजना छोटी बचत को बड़ी पूंजी में बदल सकती है. अगर 25 साल तक हर महीने 20,000 रुपये की SIP की जाए तो करीब 3.8 करोड़ रुपये का फंड बन सकता है. रिटायरमेंट के बाद इसी रकम से 5 फीसदी SWP के जरिए नियमित आय ली जा सकती है. यह रणनीति पूंजी को सुरक्षित रखते हुए महंगाई से लड़ने में मदद करती है.
SIP से SWP तक की स्मार्ट रणनीति, पैसा भी बढ़े और आय भी मिले. (Image:AI)
SIP से SWP तक: दो चरणों की रणनीति
इस मॉडल को आमतौर पर SIP से SWP रिटायरमेंट रणनीति कहा जाता है. पहला चरण होता है संचय यानी कमाई के दौरान लगातार निवेश कर बड़ा फंड तैयार करना. दूसरा चरण होता है वितरण यानी रिटायरमेंट के बाद उसी फंड से नियमित आय लेना. रिटायर होने के बाद पूरा पैसा एक साथ निकालने के बजाय सिस्टमैटिक विदड्रॉल प्लान (SWP) अपनाया जाता है, जिसमें हर महीने या तिमाही तय रकम निकाली जाती है और बाकी पैसा निवेशित रहता है.
5 फीसदी निकासी से कैसे मिलेगी स्थिर आय?
मान लीजिए रिटायरमेंट तक 3.8 करोड़ रुपये का फंड बन गया. यदि इस पर सालाना 5 प्रतिशत की निकासी की जाए तो करीब 19 लाख रुपये सालाना या लगभग 1.58 लाख रुपये मासिक आय मिल सकती है. अगर शेष रकम पर औसतन 8 प्रतिशत रिटर्न मिलता रहे तो पहले साल में ही रिटर्न 30 लाख रुपये के आसपास हो सकता है. यानी 19 लाख की निकासी के बाद भी फंड में बढ़त संभव है. यही कारण है कि 4 से 6 प्रतिशत की वार्षिक निकासी दर को लंबे समय तक टिकाऊ माना जाता है.
पूरा पैसा निकालना क्यों सही नहीं?
रिटायरमेंट के समय पूरा फंड एक साथ निकाल लेना आकर्षक लग सकता है, लेकिन इसके नुकसान भी हैं. एकमुश्त निकासी पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है और बड़ी रकम के गलत उपयोग का खतरा भी रहता है. साथ ही चक्रवृद्धि की ताकत खत्म हो जाती है. SWP अनुशासन बनाए रखता है और निवेश का शेष हिस्सा बढ़ता रहता है, जिससे महंगाई से मुकाबला करना आसान होता है.
तीन बकेट रणनीति से मिलेगा संतुलन
वित्तीय सलाहकार अक्सर रिटायरमेंट से एक-दो साल पहले पोर्टफोलियो को तीन हिस्सों में बांटने की सलाह देते हैं. पहला बकेट लिक्विड फंड में, जिसमें दो साल के खर्च का पैसा रखा जाए. दूसरा हिस्सा हाइब्रिड या इनकम फंड में मध्यम अवधि के लिए. तीसरा हिस्सा इक्विटी फंड में, जो लंबी अवधि में वृद्धि देता रहे. इससे बाजार गिरावट के समय घबराकर शेयर बेचने की जरूरत नहीं पड़ती और खर्च भी प्रभावित नहीं होता.
SWP का टैक्स फायदा भी अहम
इक्विटी म्यूचुअल फंड में SWP का एक बड़ा लाभ टैक्स दक्षता है. एक साल से ज्यादा समय तक रखे गए फंड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स सिर्फ लाभांश हिस्से पर लगता है, पूरी निकासी रकम पर नहीं. इससे पोस्ट-टैक्स रिटर्न बेहतर हो सकता है, खासकर तब जब फिक्स्ड डिपॉजिट का रिटर्न महंगाई को मात नहीं दे पाता.
जल्दी शुरुआत और निरंतरता ही असली कुंजी
बढ़ती जीवन प्रत्याशा और महंगाई को देखते हुए रिटायरमेंट प्लानिंग अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है. 20,000 रुपये की मासिक SIP से 25 साल में 3.8 करोड़ रुपये बनना इस बात का उदाहरण है कि समय और अनुशासन कितने महत्वपूर्ण हैं. अगर इस फंड को समझदारी से SWP के जरिए उपयोग किया जाए तो रिटायरमेंट के बाद भी नियमित आय के साथ पूंजी सुरक्षित रह सकती है. सही योजना, धैर्य और संतुलन ही आर्थिक स्वतंत्रता की असली नींव है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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