क्यों उठी इतनी बड़ी मांग?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है. मीडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता की वजह से क्रूड ऑयल महंगा हो गया है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल विदेशों से खरीदता है इसलिए इसका काफी ज्यादा असर देश पर पड़ रहा है. कोटक का कहना है कि सरकारी तेल कंपनियां इस समय भारी नुकसान झेल रही हैं. तेल कंपनियों को हर महीने करीब 25000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. पेट्रोल पर तकरीबन 14 रुपये और डीजल पर लगभग 11 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है, यानी कंपनियां जितने में तेल नहीं बेच रही हैं उससे ज्यादा नुकसान झेल रही हैं.
दो बार बढ़ चुके हैं दाम
पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमत दो बार बढ़ भी चुकी है. पहले तो 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ थे लेकिन अब 90 पैसे प्रति लीटर तक दाम बढ़ गए हैं. बावजूद इसके कोटक का कहना है कि ये बढ़ोतरी अभी भी काफी नहीं है. यही वजह है कि कंपनी ने कहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची रहीं, तो आगे और बड़ा झटका लग सकता है.
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?
जब भी पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, तो इसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर ही पड़ता है. सिर्फ गाड़ी चलाना ही महंगा नहीं होता बल्कि ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से खाने-पीने और डेली की चीजों के दाम भी बढ़ जाते हैं और फिर सारा बजट बिगड़ जाता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इससे महंगाई बढ़ती है. दूध, फल, सब्जी, राशन और ऑनलाइन डिलीवरी तक भी महंगी हो जाती हैं. मान के चलिए कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ऐसे ही ऊंची रहीं, तो दबाव बढ़ सकता है. फिलहाल, सबकी नजर कच्चे तेल की कीमत पर बनी हुई है. अगर तनाव कम होता है और तेल सस्ता होता है, तो आम जनता को राहत जरूर मिलेगी. लेकिन अगर हालात और बिगड़ते हैं तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल और महंगा भी हो सकता है.
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