राज्य सरकार ने झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। इस अधिसूचना से राज्य में नौकरी कर रहे 2627 पदाधिकारी और कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ गई है।
– 10 परीक्षाओं के 752 वैसे पद हैं, जिसकी प्रारंभिक परीक्षा या लिखित परीक्षा हो चुकी है
– सात प्रतियोगी परीक्षाओं के 501 पदों का विज्ञापन रद्द
– 11वीं से 13वीं जेपीएससी के सफल 342 अभ्यर्थी भी विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनकी नियुक्ति परीक्षा को भी रद्द कर दिया गया है
- सीजीएल से नियुक्त अभ्यर्थी जब ड्यूटी के लिए प्रोजेक्ट भवन पहुंचे तो रोक दिया गया, विरोध के बाद सिर्फ उपस्थिति दर्ज करने दी गई
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा और उससे जुड़ीं नियुक्तियां रद्द करने के फैसले के खिलाफ मंगलवार को चयनित अभ्यर्थियों (जो सचिवालय में कार्यरत हैं) में भारी नाराजगी रही। रोज की तरह जब सभी सचिवालयकर्मी मंगलवार को भारी बारिश में ड्यूटी के लिए प्रोजेक्ट भवन पहुंचे तो उन्हें मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया। प्रवेश के लिए आईडी कार्ड मांगे गए। बगैर आईडी दिखाए उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने भवन के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके चलते मुख्य गेट बंद करना पड़ा।
बढ़ते विरोध को देखते हुए बाद में सभी को प्रोजेक्ट भवन में प्रवेश दिया गया कि वे केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। वहीं, पुराने कर्मचारियों को भी आईडी कार्ड दिखाने के बाद ही अंदर प्रवेश दिया गया। तनाव देखते हुए परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। उपस्थिति दर्ज कराने के बाद कर्मी फिर गेट के बाहर आकर विरोध जताने लगे, जो देर शाम तक जारी रहा। देर शाम सभी कर्मियों ने प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक मोबाइल फ्लैश मार्च निकाला। सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि 2000 से अधिक कर्मी सड़क पर आ चुके हैं, इसलिए टकराव की स्थिति नहीं बनाइये। अगर नियुक्ति प्रक्रिया रद्द की जाती है, तो वे किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटेंगे। सभी का कहना था कि उनकी नियुक्ति पूरी तरह वैध और कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई थी, लेकिन बिना पक्ष सुने और न्याय के सिद्धांतों का पालन किए मात्र एक बयान जारी कर सभी को नौकरी से बाहर कर दिया गया। अब तक कोई लिखित कार्यालय आदेश जारी नहीं हुआ है, इसलिए जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक लिखित आदेश नहीं आता, वे इस निर्णय को स्वीकार नहीं करेंगे और अपना धरना जारी रखेंगे।
सरकार को ठोस आधार रखना चाहिए था : आशीष
सहायक प्रशाखा पदाधिकारी आशीष एक्का ने कहा कि आज जब वे सचिवालय आए तो उन्हें गेट के अंदर जाने नहीं दिया गया। इतना बड़ा फैसला इतनी जल्दबाजी में कैसे लिया जा सकता है। सरकार को कोई ठोस आधार रखना चाहिए था। जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर उचित कारण बताना चाहिए था, न कि नियुक्तियां रद्द कर देनी चाहिए थीं।
भविष्य की बलि नहीं चढ़ाए राज्य सरकार : महेश
सीजीएल परीक्षा से चयनित सर्किल इंस्पेक्टर (सीआई/राजस्व उप-निरीक्षक) महेश कुमार ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने मेहनत, प्रतिभा और पारदर्शी अंक प्रणाली के आधार पर अपना स्थान हासिल किया है, उनके भविष्य की कुर्बानी नहीं दी जानी चाहिए, यह गलत होगा।
सरकार ने दबाव में लिया एकतरफा फैसला: राहुल
जल संसाधन विभाग में कार्यरत सहायक प्रशाखा पदाधिकारी राहुल कुमार ने बताया कि उनके नियुक्ति पत्र में यह स्पष्ट उल्लेख था कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी जांच करेगी और दोषी पाए जाने पर ही कार्रवाई होगी। सरकार ने इन तमाम बातों को नजरअंदाज करते हुए भीड़ के दबाव में एकतरफा निर्णय ले लिया।
मेहनत से सफल छात्रों के साथ अन्याय क्यों : चंदन
पथ निर्माण विभाग में कार्यरत एएसओ चंदन ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने सही तरीके से चयन हासिल किया, उनके साथ यह अन्याय क्यों हो रहा है। उनका कहना था कि यदि कोई गलत तरीके से संलिप्त पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई अवश्य हो, लेकिन मेहनत से सफल होने वालों को सजा नहीं दी जानी चाहिए।
सरकार पहले जांच तो कराए, हम साथ हैं : सुप्रिया
वित्त विभाग में कार्यरत एएसओ सुप्रिया कुमारी ने कहा कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द करना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके नियुक्ति पत्र में स्पष्ट लिखा था कि सरकार गड़बड़ी की जांच करेगी और दोषी पाए जाने पर ही कार्रवाई की जाएगी। इसके बजाय सभी अभ्यर्थियों को एक झटके में बाहर करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि वे निष्पक्ष जांच कराने के लिए सरकार के साथ हैं, बशर्ते सरकार पहले जांच पूरी कराए।
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