जींद का एक युवक कजाकिस्तान से फर्जी ट्रैवल एजेंटों के चंगुल से अपनी जान बचाकर वापस इंडिया लौटा है। युवक ने पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह से मिलकर न्याय की गुहार लगाई है। उसने अपनी आपबीती साझा की, ताकि भविष्य में अन्य युवा ऐसे धोखे का शिकार न हों। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, ढाढरथ निवासी हेमराज और उसके एक दोस्त ने फोन के माध्यम से जालंधर के ट्रैवल एजेंट मनप्रीत, सोनू और परविंदर कौर से संपर्क किया था। एजेंटों ने उन्हें 22 लाख रुपए में कनाडा भेजने का सौदा तय किया। 27 फरवरी 2026 को एजेंटों ने उन्हें दिल्ली से मुंबई की टिकट भेजी। फर्जी निकली कजाकिस्तान मुंबई पहुंचने पर उन्हें अल्माटी (कजाकिस्तान) की टिकटें दी गईं, जो हवाई अड्डे पर फर्जी निकलीं। जिसके बाद उन्हें अपनी जेब से 33 हजार रुपए खर्च कर नई टिकट खरीदनी पड़ीं। 28 फरवरी को वे अल्माटी पहुंचे, जहां एजेंटों ने उन्हें एक मकान में ले जाकर उनका सारा सामान और फोन छीन लिया। इसके बाद उनके हाथ-पांव बांधकर उन्हें बंधक बना लिया गया। कपड़े उतरवाकर बनाई वीडियो 1 मार्च को एजेंटों ने दोनों युवकों के कपड़े उतरवाकर उनका वीडियो बनाया। परिजनों को डराने के लिए उनके साथ मारपीट की गई और ब्लेड से भी हमला किया गया। आरोपियों ने उन्हें प्रताड़ित कर एक वीडियो बनवाया, जिसमें उनसे जबरन कहलवाया गया कि वे टोरंटो (कनाडा) पहुंच गए हैं, ताकि उनके घरवाले एजेंटों को 22 लाख रुपए का भुगतान कर दें। पुलिस ने एजेंटों के कब्जे से कराया मुक्त हेमराज ने सूझबूझ दिखाते हुए अपने अमेरिका में रह रहे भाई को अपने फोन से गुप्त लोकेशन भेज दी। 4 मार्च 2026 को कजाकिस्तान पुलिस ने हेमराज और उसके दोस्त को एजेंटों के चंगुल से छुड़वा लिया। वे 14 अप्रैल को सुरक्षित अपने घर लौट आए। जींद के पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह ने अपील की है कि वे एजेंटों की पूरी छानबीन करें और हवाई टिकटों का सत्यापन अवश्य करवाएं। उन्होंने सस्ते और सीधे रास्ते के लालच से बचने, परिजनों को हर अपडेट देने और फर्जी एजेंटों के झांसे में न आने की सलाह दी है।
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