मुंबई, चार सितंबर जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ने धन शोधन के एक मामले में यहां एक अदालत के समक्ष आरोप से मुक्त किये जाने के आग्रह वाली याचिका में शुक्रवार को कहा कि कंपनी को अप्रैल 2019 में वित्तीय संकट का सामना प्रतिकूल वृहद आर्थिक स्थितियों के कारण करना पड़ा था, न कि उनकी ओर से किए गए किसी धोखाधड़ी वाले आचरण की वजह से। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हालांकि इस याचिका का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने एक सुनियोजित धोखाधड़ी रची। देश की एक प्रमुख एयरलाइन को खत्म कर दिया।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ धोखाधड़ी की और एक जटिल वैश्विक धन शोधन नेटवर्क के माध्यम से खुद को तथा अपने परिवार को समृद्ध बनाया। गोयल को सितंबर 2023 में ईडी ने गिरफ्तार किया था। ईडी ने दावा किया था कि कारोबारी ने केनरा बैंक द्वारा जेट एयरवेज को दिए गए 538.62 करोड़ रुपये के ऋण की हेराफेरी कर धन शोधन किया था।
इस समय चिकित्सा आधार पर जमानत पर चल रहे 77 वर्षीय गोयल ने याचिका में कहा कि जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड (जेआईएल) को प्रतिकूल वृहद आर्थिक स्थितियों के कारण गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा जो उसके नियंत्रण से बाहर थीं। इन स्थितियों में विमान ईंधन की बढ़ती कीमतें, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव और तीव्र प्रतिस्पर्धा शामिल थीं। उन्होंने कहा कि बढ़ती वित्तीय देनदारियों को पूरा करने में असमर्थता के कारण एयरलाइन को अप्रैल 2019 में अपने परिचालन को अस्थायी रूप से निलंबित करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
याचिका में कहा गया, ऐसा पूरी तरह से बाजार की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण हुआ, न कि आवेदक (गोयल) या प्रबंधन के अन्य सदस्यों द्वारा किए गए किसी धोखाधड़ी वाले आचरण की वजह से। गोयल ने ईडी के इन आरोपों से इनकार किया कि सामान्य बिक्री प्रतिनिधि (जीएसए) के माध्यम से धन की हेराफेरी की गई थी। उन्होंने कहा कि जेआईएल का वित्तीय संकट व्यावसायिक और उद्योग स्थितियों का परिणाम था, न कि धन शोधन का कोई सबूत।
मामले की अगली सुनवाई नौ सितंबर को होगी।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.