साल 2005 क्रिकेट फैंस के लिए इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक एशेज सीरीज का साल था। लेकिन इसी दौरान यूनाइटेड किंगडम के पास स्थित छोटे से द्वीप जर्सी में क्रिकेट की एक अनोखी कहानी लिखी जा रही थी। यहां सेंट मार्टिन इलाके के किसान जिमी परचार्ड ने अपने घर के पीछे मौजूद आलू के खेत को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में बदल दिया। आज यही मैदान फार्मर्स क्रिकेट ग्राउंड के नाम से जाना जाता है और जर्सी क्रिकेट का प्रमुख केंद्र है। इस मैदान की शुरुआत 1977 में हुई, जब स्थानीय किसान दिनभर खेतों में काम करने के बाद शाम को क्रिकेट खेलते थे। खेल खत्म होने पर अक्सर एक ही बात होती थी ‘काश, हमारा अपना मैदान होता।’ जिमी ने इस सपने को सच करने का फैसला किया। 2003 में उन्होंने अपने खेत में क्रिकेट पिच बनाने की अनुमति ली और दो साल बाद 2005 में इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक गैटिंग ने मैदान का उद्घाटन किया। शुरुआत बेहद साधारण थी। खिलाड़ियों के लिए सिर्फ एक अस्थायी चेंजिंग केबिन था। लेकिन जिमी के जुनून ने लोगों को प्रभावित किया। स्पॉन्सर्स जुड़े और धीरे-धीरे यहां पैवेलियन, साइटस्क्रीन, बाउंड्री और दूसरी आधुनिक सुविधाएं तैयार हो गईं। आज क्लब हाउस की दीवारों पर अमेरिका से लेकर वानुअतु तक की टीमों की कैप, तस्वीरें और यादगार चीजें सजी हैं। यह मैदान जिमी के लिए सिर्फ क्रिकेट ग्राउंड नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी का सपना है। यह सपना तब और खास हो जाता है, जब उनके बेटे चार्ल्स परचार्ड इसी मैदान पर जर्सी टीम के कप्तान के रूप में उतरते हैं। बचपन से इसी मैदान पर क्रिकेट सीखने वाले चार्ल्स 2010 में जर्सी के लिए डेब्यू कर चुके हैं और लंबे समय से टीम की कप्तानी संभाल रहे हैं। चार्ल्स कहते हैं, ‘अपने ही घर के मैदान पर कप्तान के तौर पर उतरना सबसे भावुक पल होता है। बाउंड्री के बाहर पिता और परिवार को मुझे चीयर करते देखना दुनिया का सबसे खास एहसास है।’ जर्सी फिलहाल आईसीसी टी20 रैंकिंग में 29वें स्थान पर है। टीम मामूली रन-रेट के अंतर से 2026 टी20 वर्ल्ड कप में जगह बनाने से चूक गई थी। अब उसकी पूरी नजर 2028 टी20 वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करने पर है। जब 4 हजार की आबादी ने 27 लाख को दी मात मैदान बनने के करीब दो दशक बाद, ‘फार्मर्स क्रिकेट क्लब’ ने बड़ा कारनामा किया। सेंट मार्टिन जैसे छोटे से इलाके (जिसकी आबादी महज 4,000 है) के इस क्लब ने यूरोपियन क्रिकेट लीग (टी10 टूर्नामेंट) का खिताब अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने इटली की राजधानी रोम (जिसकी आबादी 27.5 लाख है) की टीम को 42 रनों से शिकस्त दी। इतना ही नहीं, इसी मैदान पर जर्सी की राष्ट्रीय टीम ने इटली को हराकर पहली बार ‘वर्ल्ड कप ग्लोबल क्वालिफायर’ में भी अपनी जगह पक्की की थी।
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