अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को बातचीत रोकने के लिए ‘‘कीमत चुकाने’’ की धमकी दिए जाने के बाद अमेरिका ने बृहस्पतिवार सुबह तेहरान पर नए सिरे से हवाई हमले किए, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन को निशाना बनाकर हमले किए।
ईरान के कई शहरों में हुए इन नए हमलों के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की कोशिशें फिर से ठप पड़ती दिखाई दीं। ईरान ने इस बात पर जोर दिया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है और तेल की कीमतों में उछाल आया है।
यह इस सप्ताह तीसरी बार था जब दोनों पक्षों के बीच जवाबी हमलों ने दो महीने पुराने युद्धविराम की परीक्षा ली।
ट्रंप ने ईरान से युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया है और इस सप्ताह की शुरुआत में संकेत दिया था कि कुछ ही दिनों में समझौता हो सकता है।
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि यदि अमेरिका समझौता चाहता है तो उसे बल प्रयोग की धमकियों से बचना चाहिए।
उन्होंने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा, ‘‘ईरान ने कभी धमकियों और दबाव में बातचीत नहीं की है और न ही भविष्य में दबाव के आगे झुकेगा।’’
इसके बावजूद दोनों देश संघर्ष समाप्त करने का रास्ता तलाशते दिख रहे हैं और इसे अपने-अपने देशों में राजनीतिक जीत के रूप में पेश करना चाहते हैं।
भारी बमबारी के बावजूद ईरान ने अपनी मजबूती दिखाई है। उसका मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद करने की उसकी क्षमता उसे सौदेबाजी करने का रास्ता देती है।
यह जलडमरूमध्य तेल और प्राकृतिक गैस का एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
वहीं, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ऐसे लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के पक्षधर दिखाई देते हैं, जिनसे समझौता और कठिन हो सकता है। इनमें ईरान की धर्मतांत्रिक सरकार का पतन, उसके परमाणु कार्यक्रम का अंत और लेबनान स्थित ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला का विनाश शामिल है। सोमवार को ईरान और इजराइल ने एक-दूसरे पर हमले किए थे।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने ईरान में सूर्योदय से ठीक पहले अपने ताजा हवाई हमलों का दौर ‘‘पूरा’’ कर लिया। कमांड के अनुसार, ये हमले ‘‘ईरान की अनुचित और लगातार आक्रामकता के जवाब में’’ किए गए और इनमें ईरानी सैन्य निगरानी क्षमताओं, संचार प्रणालियों तथा वायु रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया गया।
हमलों से हुए नुकसान का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया। बताया गया कि ये कार्रवाई अमेरिकी वायुसेना, मरीन कोर और नौसेना ने मिलकर की।
इन हमलों के दौरान ईरान की राजधानी तेहरान, बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के दक्षिणी इलाकों में विस्फोटों की आवाजें गूंजती रहीं।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर हमले किए, जिसके बाद कुवैत की वायु रक्षा प्रणालियों ने हमले को विफल करने के लिए कार्रवाई की और कुवैत ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। कुवैत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने बताया कि उड़ानों का मार्ग परिवर्तित कर उन्हें अन्य हवाई अड्डों की ओर भेजा जा रहा है, हालांकि इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी गई।
कुवैत ने कहा, ‘‘यह कदम कुवैत पर ईरान के निंदनीय हमलों और उनसे क्षेत्र में नागरिक विमानन यातायात को उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों को देखते हुए उठाया गया है।’’
हाल के दिनों में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी ईरान के हमले की चपेट में आया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। बुधवार को ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर हमले किए थे। इन तीनों देशों में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
इजराइल ने भी बृहस्पतिवार तड़के उत्तरी क्षेत्रों के निवासियों को संभावित हमले की आशंका के चलते सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी। वहीं, जॉर्डन स्थित अमेरिकी दूतावास ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि ‘‘सूचनाओं के अनुसार जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में मिसाइलें, ड्रोन या रॉकेट मौजूद हैं।’’
हालांकि, जॉर्डन के सरकारी मीडिया की ओर से मिसाइल हमलों की इन रिपोर्टों की तत्काल पुष्टि नहीं की गई। दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया कि उसने बृहस्पतिवार को एक बार फिर जॉर्डन स्थित मुवफ्फक सल्ती एयर बेस को निशाना बनाया है।
अमेरिकी सेना ने बुधवार को कहा कि उसने पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एम/टी सेटेबेलो के इंजन कक्ष पर सटीक हथियारों से हमला किया। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह जहाज ईरानी तेल लेकर नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। यह ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी कार्रवाई से निष्क्रिय किया गया आठवां व्यापारी जहाज था।
इस बीच समझौते के प्रयास जारी हैं। अमेरिका से परामर्श के बाद कतर का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को वार्ता के लिए तेहरान पहुंचा। एक अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर यह जानकारी दी।
दोनों देशों के बीच यह तनाव अमेरिकी सेना के एक हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के एक दिन बाद बढ़ा, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के पास गश्त कर रहा था। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार हेलीकॉप्टर की टक्कर एक ईरानी ड्रोन से हुई थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि टक्कर जानबूझकर कराई गई थी या नहीं।
नवंबर में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित ट्रंप शीघ्र समाधान चाहते हैं। लेकिन उनकी कुछ मांगें ऐसी हैं जिन्हें स्वीकार करना ईरान के लिए कठिन होगा।
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ दे।
ईरान इस यूरेनियम को छोड़ने से इनकार कर रहा है और प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है। साथ ही वह अंतिम समझौते से पहले ही अपनी कुर्क विदेशी संपत्तियों को मुक्त कराने की भी मांग कर रहा है, जिसे ट्रंप ने खारिज कर दिया है।
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