तिब्बत में चीन-नेपाल सीमा के पास दो दिन पहले आई भीषण बाढ़ के बाद लापता हुए ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। समूह की समन्वयक ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ईशा फाउंडेशन के नेतृत्व में गए 77 सदस्यीय समूह से संपर्क नहीं हुआ है।
ईशा फाउंडेशन की स्थापना भारतीय आध्यात्मिक नेता जग्गी वासुदेव ने की है, जिन्हें सद्गुरु के नाम से जाना जाता है। समूह की समन्वयक मां गंभीरी ने पीटीआई-को बताया कि सद्गुरु आपदा स्थल जियारोंग जाकर मदद करना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि समूह में 19 देशों के नागरिक शामिल थे और मदद एवं जानकारी के लिए भारत, चीन और नेपाल में संबंधित दूतावासों के अलावा विभिन्न कार्यालयों तथा मंत्रालयों से संपर्क किया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘लापता 77 तीर्थयात्रियों के बारे में पिछले दो दिन से कोई जानकारी नहीं मिली है। बचाव दल मौके पर हैं, लेकिन अभी तक कोई सूचना नहीं है।
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