अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जंग जारी है। इस कड़ी में कुछ अमेरिकी चैनलों ने दावा किया है कि इस वॉर में भारत ईरान का समर्थन कर रहा है। भारत के विदेश मंत्रालय ने ऐसी तमाम रिपोर्ट्स का खंडन किया है। विदेश मंत्रालय ने ओएएन यानी कि अमेरिका स्थित चैनल पर किए गए दावों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताकर खारिज कर दिया। विवाद की शुरुआत तब शुरू हुई जब भड़काऊ रिपोर्टिंग के लिए पहचाने जाने वाले एक रूढ़िवादी अमेरिकी नेटवर्क वन अमेरिका न्यूज़ ने दावा किया कि मुंबई और कोच्ची में भारतीय नौसैनिक सुविधाओं का इस्तेमाल अमेरिकी युद्धपोतों के जरिए ईरानी ठिकानों पर हमले के लिए किया गया था। ओए के उस सेगमेंट को लाखों लोगों ने देखा जिसमें गुमनाम सैन्य सूत्रों का हवाला दिया गया था और यह अनुमान लगाया गया था कि यह खुफिया सहयोग फारस की खाड़ी में तेहरान के प्रभाव के खिलाफ एक बड़े स्तर पर भारत अमेरिकी रणनीतिक बदलाव का हिस्सा था। यह रिपोर्ट एक्स और टेलीग्राम जैसे प्लेटफार्म पर तेजी से वायरल हो गई। जिससे अटकलें लगने लगी और दक्षिण एशिया व मिडिल ईस्ट के नेटिजंस ने तीखी प्रतिक्रियाएं मिली।
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वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विदेश मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट चेक अकाउंट के माध्यम से इस बात का खंडन किया गया। साथ ही अमेरिकी चैनल से आने वाली ऐसी निराधार रिपोर्टों के प्रति आगाह किया। भारत की तरफ से दिया गया यह जवाब अमेरिका के साथ मजबूत रक्षा संबंधों और ईरान के साथ भारत के महत्वपूर्ण ऊर्जा संबंधों के बीच संतुलन स्थापित करती है। विदेश मंत्रालय ने जनता से स्रोतों की पुष्टि करने और झूठी खबरों की रिपोर्ट करने का आग्रह किया। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग के बीच जो हालिया ड्रोन हमलों और साइबर झड़पों से चिन्हित हैं। नई दिल्ली का स्पष्टीकरण एक स्थिर कार्य शक्ति के रूप में उसकी भूमिका को मजबूत करता है।
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उधर अमेरिकी पनडुब्बी के एक ईरानी युद्धपोत को डुबोने की घटना के बाद ईरान ने बृहस्पतिवार तड़के युद्ध के छठे दिन इजराइल को निशाना बनाकर मिसाइल दागीं। ईरान ने पूरे क्षेत्र में सैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी भी दी है। इस हमले की इजराइल द्वारा घोषणा किए जाने से कुछ ही समय पहले उसकी सेना ने कहा कि उसने लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला चरमपंथी समूह को निशाना बनाते हुए नए हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका और इजराइल ने बुधवार को ईरान के सुरक्षा बलों और प्रशासनिक संस्थानों को निशाना बनाते हुए बमबारी तेज कर दी थी। ईरान पर हमलों की तीव्रता इतनी भीषण थी कि सरकारी टेलीविजन ने घोषणा की कि संघर्ष की शुरुआत में मारे गए ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए आयोजित शोक समारोह को स्थगित करना होगा।
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अयातुल्ला अली खामेनेई के पूर्ववर्ती अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी के अंतिम संस्कार में 1989 में लाखों लोग शामिल हुए थे। अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान के प्रमुख नेतृत्व, मिसाइल भंडार और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाते हुए युद्ध की शुरुआत की और यह संकेत दिया कि उनका लक्ष्य ईरान में सरकार को गिराना है। सटीक लक्ष्य और समयसीमा में बार-बार बदलाव के कारण इस युद्ध के अनिश्चित काल तक जारी रहने की आशंका है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के मोर्चे पर ‘‘शानदार प्रदर्शन’’ के लिए बुधवार को अमेरिकी सेना की प्रशंसा की। वहीं, अमेरिकी सीनेट में उनके सहयोगी रिपब्लिकन सांसदों ने ईरान के मुद्दे पर ट्रंप का साथ दिया और युद्ध रोकने की मांग वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया। संघर्ष बढ़ने के साथ ही ईरान ने बहरीन, कुवैत और इजराइल पर हमले किए। तुर्किये ने कहा कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को तुर्किये के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया।
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