पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। इसी बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि फिलहाल अमेरिका के साथ दोबारा युद्ध की संभावना कम है, लेकिन अगर किसी तरह का हमला हुआ तो ईरान पूरी तैयारी के साथ जवाब देगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार आईआरजीसी नौसेना के उप राजनीतिक प्रमुख मोहम्मद अकबरजादेह ने कहा कि दुश्मन की कमजोरी की वजह से युद्ध की आशंका कम है, लेकिन ईरानी सेना पूरी सतर्कता के साथ तैयार बैठी है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के हथियारबंद बल हर स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं।
बता दें कि अकबरजादेह ने ईरान के दक्षिणी समुद्री तट को लेकर भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि चाबहार से माहशहर तक का पूरा इलाका हमलावरों के लिए कब्रगाह बना दिया जाएगा। गौरतलब है कि ये क्षेत्र ईरान के दक्षिणी तटीय इलाके में आते हैं और सामरिक रूप से बेहद अहम माने जाते हैं।
इधर ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप भी लगाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि संघर्ष विराम लागू होने के बाद भी अमेरिका लगातार “गैरकानूनी और अन्यायपूर्ण” कार्रवाई कर रहा है। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सेना ने ईरानी व्यापारिक जहाजों के खिलाफ कई समुद्री हमले किए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान के होर्मोजगान प्रांत में मंगलवार तड़के विस्फोटों की आवाजें सुनी गई थीं। ईरान ने इन हमलों को युद्धविराम का खुला उल्लंघन बताया है। वहीं अमेरिका का कहना है कि उसने आत्मरक्षा में कार्रवाई की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल प्रक्षेपण ठिकानों और उन नौकाओं को निशाना बनाया जो होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही थीं।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
अमेरिकी अधिकारियों का यह भी दावा है कि एक अमेरिकी लड़ाकू विमान पर मिसाइल हमला हुआ था, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। वहीं ईरान लगातार अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है कि वह क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां कम करे।
हालांकि दोनों देशों के बीच फिलहाल युद्धविराम लागू है, लेकिन लगातार आ रहे बयान और सैन्य गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
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