मध्य पूर्व से एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां ईरान ने अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ता के अगले दौर में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है।
बता दें कि ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने कहा है कि फिलहाल किसी भी नई वार्ता की कोई योजना नहीं है। मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान ने इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया है कि वह लगातार अपनी शर्तें बदल रहा है और बातचीत के दौरान विरोधाभासी रुख अपना रहा है। साथ ही, ईरान ने समुद्री नाकेबंदी और हाल के समुद्री घटनाक्रमों को भी बातचीत में बाधा बताया है।
गौरतलब है कि ईरान का कहना है कि मौजूदा हालात में बातचीत का माहौल सकारात्मक नहीं कहा जा सकता और फिलहाल किसी ठोस नतीजे की उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है। वहीं, इस्लामाबाद में संभावित वार्ता को लेकर सामने आई खबरों को भी ईरान ने खारिज करते हुए इसे एक तरह का दबाव बनाने की कोशिश बताया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेजा अमीरी मोघदम ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ अमेरिका नाकेबंदी जारी रखता है और दूसरी तरफ बातचीत की बात करता है, जो सही नहीं है। उनका कहना है कि जब तक समुद्री नाकेबंदी खत्म नहीं होती, तब तक मतभेद बने रहेंगे।
बता दें कि यह पूरा विवाद होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। ईरान का आरोप है कि उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी सामूहिक सजा के समान है।
गौरतलब है कि हाल ही में एक और घटना ने तनाव को और बढ़ा दिया, जब खबर आई कि एक अमेरिकी युद्धपोत ने ईरानी झंडे वाले एक मालवाहक जहाज को रोककर नुकसान पहुंचाया। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज पहले से प्रतिबंधों के दायरे में था, जबकि ईरान ने इस कार्रवाई को सशस्त्र लूट बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने भी साफ कर दिया है कि फिलहाल आगे की किसी वार्ता में शामिल होने की योजना नहीं है। वहीं अन्य मीडिया रिपोर्टों में भी कहा गया है कि जब तक ईरान पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, तब तक बातचीत का माहौल तैयार नहीं हो पाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है, ऐसे में यहां तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी आ गई है।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर न सिर्फ क्षेत्रीय शांति पर पड़ेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और संवेदनशील हो सकती है।
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