ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में हुई वार्ता में ईरान ने 5 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन अमेरिका 20 साल की शर्त पर अड़ा रहा। इस असहमति के कारण दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके तुरंत बाद अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी बंदरगाहों की सैन्य नाकाबंदी शुरू कर दी। अमेरिकी सेना ने साफ किया कि ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोका जाएगा, हालांकि अन्य देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जाएगी। नाकाबंदी लागू होने के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने नए तरीके से युद्ध करने की चेतावनी दी, जबकि सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने कहा कि फारस की खाड़ी और ओमान सागर का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा। नाकाबंदी पर अमेरिका को यूरोपीय देशों का समर्थन नहीं नाकाबंदी पर अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला। कई यूरोपीय देशों ने नाकाबंदी में शामिल होने से इनकार कर दिया, वहीं एक ईरानी टैंकर ने नाकाबंदी को चुनौती देते हुए रास्ता पार किया। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से करीब 20% तेल सप्लाई होती है। इससे पहले ईरान ने भी यहां पश्चिमी जहाजों की आवाजाही रोक दी थी। लगातार बढ़ते तनाव का असर तेल बाजार पर भी दिख रहा है। फरवरी के अंत से शुरू हुए संघर्ष के बाद कीमतों में 50% तक उछाल आया है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा और बाद में करीब 99 डॉलर पर आ गया। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स ईरान जंग जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
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