संयुक्त राष्ट्र में सोमवार (27 अप्रैल) को ईरान और अमेरिका के अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई. तेहरान के परमाणु कार्यक्रम और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा करने वाले सम्मेलन के उपाध्यक्ष के रूप में ईरान के चयन को लेकर जमकर टकराव हुआ.
क्या बोले अमेरिकी अधिकारी
अमेरिकी हथियार नियंत्रण और अप्रसार ब्यूरो के सहायक सचिव क्रिस्टोफर यॉ ने कहा कि ईरान ने अपनी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया है और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ पूरी तरह सहयोग करने में विफल रहा है. उन्होंने आगे कहा कि इस पद पर उनकी (ईरान) की नियुक्ति एक अपमान है. ईरान ने इस बयान को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है तो वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने संघर्ष विराम और पीस टॉक की अपील की है.
ईरान के राजदूत का पलटवार
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में ईरान के राजदूत रेजा नजफी ने अमेरिका के दावों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने वाला एकमात्र देश होने के नाते अमेरिका को दूसरों पर फैसला नहीं सुनाना चाहिए.
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संयुक्त राष्ट्र ने जाहिर की चिंता
ईरान ने अमेरिका द्वारा आर्थिक प्रतिबंध हटाने की शर्त पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का प्रस्ताव रखा है, जिसे लेकर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जाहिर की है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बार-बार जोर दिया है कि हिंसक टकराव का कोई सैन्य समाधान नहीं है और बातचीत के जरिए ही समाधान निकाला जा सकता है. उन्होंने दोनों पक्षों से फिर से शांति वार्ता की अपील की है.
बता दें कि 1980 से ईरान और अमेरिका के बीच कोई कूटनीतिक संबंध नहीं हैं. दोनों देश एक-दूसरे के साथ सीधे बातचीत के बजाय संयुक्त राष्ट्र के मंच का उपयोग कर रहे हैं. ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताया है, तो वहीं दूसरी और अमेरिका का कहना है कि तेहरान परमाणु हथियार विकसित करना चाहता है.
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