ईरान से जुड़े एक हैकिंग ग्रुप ने अमेरिका की मेडिकल डिवाइस और हेल्थकेयर सेवाएं देने वाली कंपनी स्ट्राइकर पर बड़े साइबर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है. यह जानकारी उस ग्रुप के टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट किए गए संदेशों के जरिए सामने आई है. मिशिगन स्थित इस कंपनी में करीब 56 हजार कर्मचारी काम करते हैं और इसके ऑपरेशन 61 देशों में फैले हुए हैं. कंपनी ने अमेरिकी रेगुलेटिंग संस्था U.S. सिक्योरिटी और एक्सचेंज कमीशन में दी गई एक रिपोर्ट में बताया कि इस साइबर हमले की वजह से उसके कुछ सिस्टम में रुकावट आई है और कई सेवाओं कुछ हद तक ठर हो गई है. कंपनी ने यह भी कहा कि सभी सिस्टम पूरी तरह सामान्य होने में कितना समय लगेगा, यह अभी साफ नहीं है.
कुछ कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्टरों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि कंपनी के लॉगिन पेज पर ईरान से जुड़े एक हैकिंग ग्रुप का लोगो दिखाई दे रहा था. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा कि फिलहाल रैनसमवेयर या किसी मालवेयर के इस्तेमाल का कोई संकेत नहीं मिला है और शुरुआती जांच के अनुसार घटना को नियंत्रण में कर लिया गया है. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इस हमले के पीछे कौन हो सकता है. मिशिगन के पोर्टेज स्थित कंपनी के मुख्यालय में फोन करने पर रिकॉर्डेड संदेश में बताया गया कि इमारत में आपात स्थिति के कारण काम प्रभावित हुआ है. इस घटना के बाद कंपनी के शेयरों में भी गिरावट देखी गई. बुधवार (11 मार्च 2026) को Stryker (SYK) के शेयर लगभग 3.6 प्रतिशत गिरकर बंद हुए.
युद्ध के दौरान साइबर हमलों की आशंका बढ़ी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद साइबर हमलों की आशंका बढ़ गई थी. साइबर सुरक्षा कंपनी Halcyon की वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व FBI साइबर अधिकारी सिंथिया कैसर ने कहा कि इस तरह के हमलों को लेकर पहले से चिंता जताई जा रही थी. उनके अनुसार ईरान से जुड़े समूह अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाकर बदला लेने की कोशिश कर सकते हैं. हमले की जिम्मेदारी लेने वाला ग्रुप हांडाला पहले भी इजरायल और अन्य देशों के कई संस्थानों पर साइबर हमलों का दावा कर चुका है. इस ग्रुप ने अपने टेलीग्राम संदेश में कहा कि यह हमला दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में एक स्कूल पर हुए हमले के जवाब में किया गया है. ईरान के जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मिशन के राजदूत अली बहरीनी के अनुसार मीनाब के उस स्कूल पर हमले में करीब 150 छात्रों की मौत हुई थी, हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
कंपनी के नेटवर्क में कब आई गड़बड़ी?
रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के नेटवर्क में गड़बड़ी बुधवार आधी रात के बाद शुरू हुई. कर्मचारियों ने पाया कि माइक्रोसॉफ्ट विंडोज पर चलने वाले कई रिमोट डिवाइस, जैसे लैपटॉप और मोबाइल फोन, जो कंपनी के सिस्टम से जुड़े थे, उनका डेटा मिटा दिया गया था. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन संभावित साइबर खतरों पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरी एजेंसियों तथा कानून प्रवर्तन संस्थाओं के साथ मिलकर प्रतिक्रिया की तैयारी कर रहा है. इस मामले पर FBI और साइबर सिक्योरिटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. साइबर सुरक्षा कंपनी चेक पॉइंट के अनुसार हैंडाला ग्रुप कई “हैक एंड लीक” ऑपरेशन और डेटा नष्ट करने वाले हमलों से जुड़ा रहा है. कंपनी के चीफ ऑफ स्टाफ गिल मेसिंग ने कहा कि यह समूह ईरान के खुफिया मंत्रालय से जुड़ा माना जाता है और वर्षों से इसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. उनके अनुसार इस हमले की खुलकर जिम्मेदारी लेना यह दिखाता है कि ईरान से जुड़े साइबर समूह अब पहले से ज्यादा आक्रामक तरीके से काम कर रहे हैं.
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