कॉल सेंटर में नौकरी करने से लेकर कई असफलताओं का सामना करने और करीब 8 साल तक लगातार मेहनत करने के बाद उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर अपना IPS बनने का सपना पूरा किया। आइए जानते हैं उनके संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायक कहानी।
शुरुआती पढ़ाई
सूरज सिंह परिहार का उनका सफर उत्तर प्रदेश के जौनपुर के एक छोटे से गांव के स्कूल से शुरू हुआ, जहां उन्होंने अपने दादा-दादी के साथ रहकर शुरुआती पढ़ाई की। उनके दादा अक्सर देश की सेवा करने वाले अधिकारियों और जवानों की कहानियां सुनाया करते थे। इन्हीं कहानियों ने सूरज के मन में देश सेवा करने और बड़ा अधिकारी बनने का सपना जगा दिया।
बचपन में ही मिला राष्ट्रपति से पुरस्कार
पांचवीं कक्षा के बाद वह कानपुर के जाजमऊ आ गए और यहां एक हिंदी माध्यम स्कूल से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही सूरज पढ़ाई में मेधावी थे। इसके साथ ही वे खेलकूद और रचनात्मक लेखन में भी शानदार प्रदर्शन करते थे। उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, जब साल 2000 में तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने उन्हें नेशनल बालश्री पुरस्कार से सम्मानित किया।
अंग्रेजी थी कमजोर
हालांकि, इसी राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान उन्हें अपनी एक बड़ी कमजोरी का एहसास हुआ। वहां उन्होंने देखा कि दूसरे बच्चे धाराप्रवाह अंग्रेजी बोल रहे थे, जबकि वे अंग्रेजी पढ़ और लिख तो सकते थे, लेकिन आत्मविश्वास के साथ बोल नहीं पाते थे। उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। अंग्रेजी बोलने में सुधार के लिए उन्होंने नियमित रूप से अंग्रेजी अखबार पढ़ना, अंग्रेजी समाचार और टीवी चैनल देखना तथा आईने के सामने खड़े होकर बोलने का अभ्यास शुरू किया। लगातार मेहनत और अभ्यास के दम पर उन्होंने इस चुनौती को भी पार कर लिया।
12वीं में शानदार प्रदर्शन
सूरज सिंह परिहार ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 81 प्रतिशत अंक हासिल किए और पांचों विषयों में डिस्टिंक्शन प्राप्त की। उनकी इस उपलब्धि ने उनकी प्रतिभा को साबित कर दिया, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ने उनके आगे के फैसलों को प्रभावित किया। वे एक संयुक्त परिवार से थे, जहां घर की जिम्मेदारी केवल एक कमाने वाले सदस्य पर थी। ऐसे में सूरज ने महसूस किया कि उन्हें भी परिवार की आर्थिक मदद करनी चाहिए।
कोचिंग सेंटर किया शुरू
इसी सोच के साथ उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर एक छोटा-सा कोचिंग सेंटर शुरू किया। हालांकि, उनका अंतिम लक्ष्य कभी नहीं बदला। वे जानते थे कि उन्हें UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करनी है। इसलिए उन्होंने कोचिंग सेंटर से होने वाली आय के जरिए अपनी पढ़ाई और UPSC की तैयारी के लिए जरूरी संसाधन जुटाने की योजना बनाई।
कॉल सेंटर की नौकरी से बैंक मैनेजर तक
अपने सपने को पूरा करने के लिए सूरज सिंह परिहार ने कॉल सेंटर में नौकरी की। हालांकि, यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। नौकरी के लिए दिए गए वॉयस और एक्सेंट टेस्ट में वे पहली बार असफल हो गए और उन्हें वापस जाने के लिए कहा गया। लेकिन सूरज ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने मैनेजर कनिष्क से एक आखिरी मौका मांगा। उन्हें एक महीने का समय दिया गया। इस दौरान उन्होंने दिन-रात मेहनत की और अपनी अंग्रेजी व कम्युनिकेशन स्किल्स में इतना सुधार किया कि वे न सिर्फ टेस्ट पास कर गए, बल्कि कंपनी के टॉप परफॉर्मर भी बने। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उनका नाम कंपनी की ‘वॉल ऑफ फेम’ में शामिल किया गया और उनकी सैलरी में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई।
यूपीएससी था असली सपना
इसके बावजूद उनका असली सपना UPSC ही था। जब कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट ने उन्हें नौकरी में बनाए रखने के लिए दोगुनी सैलरी देने का प्रस्ताव रखा, तब भी उन्होंने उसे ठुकरा दिया। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और 2007-08 में दिल्ली जाकर UPSC की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि, लगभग छह महीने में उनकी जमा पूंजी खत्म हो गई। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने आठ अलग-अलग बैंकों की प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) परीक्षा दी और सभी में सफलता हासिल की।
बैंक में किया काम, फिर छोड़ी नौकरी
इसके बाद उन्होंने बैंक ऑफ महाराष्ट्र में करीब चार महीने तक काम किया और फिर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में शामिल हो गए। एक साल तक अलग-अलग शाखाओं में काम करने के बाद उनका प्रमोशन उत्तराखंड के चमोली में बैंक मैनेजर के पद पर हो गया। जहां अधिकतर लोगों के लिए यह करियर की बड़ी उपलब्धि होती, वहीं सूरज के लिए यह एक कठिन फैसला लेने का समय था। उन्हें एहसास था कि यदि उन्होंने बैंक मैनेजर की आरामदायक नौकरी जारी रखी, तो उनका IAS/IPS बनने का सपना पीछे छूट जाएगा। इसलिए उन्होंने बिना झिझक बैंक की नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह से UPSC की तैयारी में जुट गए।
कई असफलताओं के बाद पूरा हुआ IPS बनने का सपना
सूरज सिंह परिहार का हौसला कभी नहीं डगमगाया। UPSC की तैयारी के साथ उन्होंने SSC परीक्षा भी दी और ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल कर कस्टम्स एंड एक्साइज विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त हुए। यह एक प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी थी, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य अब भी UPSC के जरिए IPS अधिकारी बनना ही था।
UPSC का सफर उनके लिए धैर्य और संघर्ष की लंबी परीक्षा साबित हुआ। साल 2011 में वे इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। 2012 में वे मुख्य परीक्षा (Mains) भी पास नहीं कर पाए। इसके बाद 2013 में अपने तीसरे और अंतिम प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए चयन हासिल किया। हालांकि, उनका IPS बनने का सपना अभी भी अधूरा था।
आखिरी प्रयास में मिली कामयाबी
इसी बीच सरकार ने UPSC की अधिकतम आयु सीमा और प्रयासों की संख्या बढ़ा दी। इस बदलाव ने सूरज को एक और मौका दिया। उन्होंने इस अवसर का पूरा फायदा उठाया और अगले प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 189 हासिल कर आखिरकार भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित हो गए।
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