दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति से आम लोगों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार तेज होगी, वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी और इस क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। उद्योग जगत के संगठनों ने यह बात कही।
दिल्ली सरकार ने सोमवार को नई ईवी नीति को मंजूरी दी। इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी में पंजीकृत 30 लाख रुपये या उससे कम ‘एक्स-शोरूम’ कीमत वाली सभी इलेक्ट्रिक कारों को सड़क कर और पंजीकरण शुल्क में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी।
नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने वालों को पहले वर्ष 30,000 रुपये, दूसरे वर्ष 20,000 रुपये और तीसरे वर्ष 10,000 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी।
उद्योग मंडल फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप ने कहा कि सब्सिडी का यह प्रावधान आम लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा और स्वच्छ परिवहन का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाएगा।
स्वरूप ने कहा, ‘‘ यह नीति एक ओर वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने पर जोर देती है, वहीं दूसरी ओर ईवी अवसंरचना को भी मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करती है।’’
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल मिंडा ने कहा कि यह नीति राजधानी की लगातार बनी हुई वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने और टिकाऊ शहरी परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में दूरदर्शी पहल है।
उन्होंने कहा, ‘‘ चार्जिंग अवसंरचना और प्रोत्साहनों सहित ईवी परिवेश को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित 15,000 करोड़ रुपये का निवेश स्वच्छ परिवहन की ओर बदलाव को गति देने के लिए आवश्यक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’’
मिंडा ने कहा कि यह नीति वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाने के साथ-साथ नए आर्थिक अवसर भी उत्पन्न कर सकती है और अन्य राज्यों के लिए भी उनकी स्थानीय जरूरतों के अनुरूप ऐसी स्वच्छ परिवहन नीतियां अपनाने का मॉडल बन सकती है।
दिल्ली मंत्रिमंडल से मंजूर इस नीति को एक जुलाई से लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे 31 मार्च, 2030 तक दिल्ली को प्रदूषण मुक्त शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
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