इंडोनेशिया में एक बार फिर भूकंप से हाहाकार मच गया है. जावा द्वीप में शनिवार (12 सितंबर) को भूकंप के झटके महसूस किए गए. जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) की रिपोर्ट के मुताबिक, ये डीप-फोकस भूकंप था. इसकी गहराई 376 किलोमीटर पर थी.
इस तेज झटके के तुरंत बाद किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या हताहत होने की कोई सूचना सामने नहीं आई है. हालांकि स्थानीय प्रशासन की टीमें और एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को बांदा सागर में भी 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था.
डीप-फोकस भूकंप
जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के अनुसार ये भूकंप जमीन से 376 किलोमीटर (234 मील) की अत्यधिक गहराई में केंद्रित था, जिससे इसे डीप-फोकस भूकंप माना गया है. जावा में शनिवार को आए भूकंप के झटके ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को इंडोनेशिया के मालुकु द्वीप के पास बांदा सागर में आए 6.2 तीव्रता के भूकंप के बाद दर्ज किए गए हैं.
इंडोनेशिया की एक एजेंसी ने पुष्टि की थी कि शुक्रवार को आया भूकंप 143 किलोमीटर (89 मील) की गहराई पर था. एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इसमें सुनामी का कोई खतरा नहीं था और बांदा सागर के भूकंप से भी किसी नुकसान की तत्काल कोई खबर नहीं मिली थी.
इंडोनेशिया में क्यों आते हैं इतने भूकंप
ऑस्ट्रेलियाई प्लेट, सुंडा प्लेट, प्रशांत प्लेट और फिलीपीन सी प्लेट के जटिल संपर्क क्षेत्र में इंडोनेशिया स्थित है. पूर्वी इंडोनेशिया में ऑस्ट्रेलियाई प्लेट और सुंडा प्लेट की गतिविधियां काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हैं. ऑस्ट्रेलियाई प्लेट लगातार उत्तर दिशा की ओर बढ़ रही है और कई स्थानों पर सुंडा प्लेट के नीचे धंस रही है. इस पूरी प्रक्रिया को सबडक्शन कहा जाता है. सबडक्शन के दौरान प्लेटें हमेशा आसानी से नहीं खिसकतीं. कई बार उनके बीच का संपर्क क्षेत्र आपस में लॉक हो जाता है.
प्लेटों की गति रुकने के बावजूद उनके भीतर तनाव लगातार जमा होता रहता है और ये तनाव सालों, दशकों या कभी-कभी कई सदियों तक बढ़ सकता है ऐसे में जब चट्टानें इस तनाव को सहन करने की सीमा पार कर देती हैं, तो फॉल्ट अचानक से ही टूट जाता है. इसी वक्त जमा हुई एनर्जी भूकंपीय तरंगों के रूप में बाहर निकलती है और हमें भूकंप के झटके महसूस होने लगते हैं.
ये भी पढ़ें
BRICS के लिए मरा जा रहा पाकिस्तान! किया आवेदन, एंट्री के लिए भारत की हां जरूरी
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.