ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग का असर अब आपकी हवाई यात्रा पर भी पड़ने लगा है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो की फ्लाइट से यात्रा 14 मार्च से महंगी होने जा रही है। एयरलाइन ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट टिकटों पर ₹425 से ₹2300 तक फ्यूल चार्ज लगाने का फैसला किया है। इसके बाद नई बुकिंग करने वाले यात्रियों को टिकट के साथ एक्सट्रा फ्यूल चार्ज देना होगा। जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से लगाया सरचार्ज एयरलाइन का कहना है कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण जेट फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, इसलिए टिकटों पर सरचार्ज बढ़ाया गया है। इंडिगो ने यात्रियों पर पड़ने वाले बोझ को कम रखने के लिए अलग-अलग दूरी के हिसाब से चार्ज तय किया है। कंपनी ने कहा कि पूरी बढ़ी हुई लागत को वसूलने के लिए किराए में बहुत बड़ी बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन ग्राहकों की सुविधा को देखते हुए फिलहाल छोटा अमाउंट ही चार्ज किया जा रहा है। इंडिगो ने कहा कि वह स्थिति पर नजर बनाए रखेगी और जरूरत पड़ने पर इन चार्जेस में बदलाव किया जाएगा। एअर इंडिया की घरेलू फ्लाइट ₹399 महंगी एअर इंडिया ने 12 मार्च से घरेलू फ्लाइट टिकटों पर 399 रुपए का फ्यूल सरचार्ज लगा रही है। वहीं, इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। जेट फ्यूल के दाम लगातार बढ़ने से दुनियाभर की प्रमुख एयरलाइंस ने भी टिकटों के दाम बढ़ाए हैं। कई कंपनियां अपने विमानों को ग्राउंडेड करने का प्लान भी बना रही हैं। जेट फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी हुई 28 फरवरी को शुरू हुई ईरान-इजराइल जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के बाद से तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत आज 101 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। हाल ही में इसकी कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी। वहीं कई देशों में जेट फ्यूल की कीमतें संघर्ष शुरू होने के बाद से दोगुनी हो चुकी हैं। जंग से पहले जेट फ्यूल की कीमतें लगभग 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गई है। वहीं मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण दुनियाभर में अब तक 40,000 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल भी हुई हैं। एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा खर्च होता है जेट-फ्यूल जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने के चलते दुनिया भर की एयरलाइंस ने न केवल टिकट के दाम बढ़ा दिए हैं, बल्कि अपने भविष्य के वित्तीय अनुमानों यानी फाइनेंशियल आउटलुक को भी वापस ले लिया है। एयरलाइंस के लिए जेट-फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है। तेल की कीमतों में आए इस अचानक बदलाव ने एयरलाइंस के बजट को बिगाड़ दिया है। एयर न्यूजीलैंड और क्वांटास जैसी बड़ी कंपनियों ने भी साफ कर दिया है कि वे बढ़े हुए खर्च का बोझ यात्रियों पर डालेंगे। दुनियाभर में इन एयरलाइंस ने भी किराया बढ़ाया एयर न्यूजीलैंड: एयर न्यूजीलैंड ने मंगलवार को अपने टिकटों के दाम में बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की है। कंपनी ने घरेलू उड़ानों के लिए एक तरफ का किराया 10 न्यूजीलैंड डॉलर बढ़ा दिया है। वहीं शॉर्ट-हॉल इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए 20 डॉलर और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए 90 डॉलर की बढ़ोतरी की गई है। कंपनी ने 2026 के लिए अपना कमाई का अनुमान भी वापस ले लिया है, क्योंकि मार्केट में भारी अस्थिरता है। हांगकांग एयरलाइंस: हांगकांग एयरलाइंस गुरुवार से फ्यूल सरचार्ज में 35.2% तक की बढ़ोतरी करने जा रही है। मालदीव, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों के लिए यह सरचार्ज 284 हांगकांग डॉलर से बढ़ाकर 384 हांगकांग डॉलर कर दिया गया है। वहीं कैथे पैसिफिक ने मार्च में लंदन और ज्यूरिख के लिए एक्स्ट्रा फ्लाइट्स शुरू की हैं ताकि प्रभावित रूट्स के यात्रियों को ऑप्शन मिल सके। कंपनी फिलहाल हर महीने फ्यूल सरचार्ज का रिव्यू कर रही है। क्वांटास और SAS: ऑस्ट्रेलिया की फ्लैग कैरियर क्वांटास एयरवेज ने अपने इंटरनेशनल रूट्स पर किराया बढ़ा दिया है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यूरोप जाने वाली फ्लाइट्स 90% से ज्यादा फुल चल रही हैं, इसलिए वे आने वाले महीनों में कैपेसिटी बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। नॉर्डिक देशों यानी उत्तरी यूरोप की प्रमुख एयरलाइन SAS (स्कैंडिनेवियन एयरलाइंस) ने भी बढ़ती लागत को देखते हुए अस्थायी प्राइस एडजस्टमेंट लागू किया है।
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