‘युद्ध अभ्यास 2026’ में कितने सैनिक हिस्सा ले रहे हैं?
इस अभ्यास में लगभग 700 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें हर देश के 350 जवान शामिल हैं। अभ्यास का एक चरण राजस्थान के बीकानेर के पास महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हो रहा है, जहां दोनों देशों के सैनिक रेगिस्तानी हालात में लंबी दूरी तक फायरिंग, सटीक हमले (precision strikes), युद्धाभ्यास और संयुक्त ऑपरेशन का अभ्यास कर रहे हैं। दूसरी ओर, उत्तराखंड के औली में सैनिक ऊंचे पहाड़ी इलाकों में लड़ाई, मुश्किल पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन, एयर मोबिलिटी और लॉजिस्टिक्स पर ट्रेनिंग ले रहे हैं। औली, लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) से लगभग 95 किलोमीटर दूर है।
इस साल के अभ्यास की मुख्य बात
इस साल के अभ्यास की एक मुख्य बात काउंटर-ड्रोन वॉरफेयर (ड्रोन-रोधी युद्ध) पर ज़ोर देना है। भारत में पहली बार, इस अभ्यास के दौरान अमेरिका में बने ‘मोबाइल लो, स्लो, स्मॉल अनमैन्ड एयरक्राफ्ट इंटीग्रेटेड डिफीट सिस्टम’ (MLIDS) को तैनात किया जा रहा है। यह सिस्टम दोनों सेनाओं को ड्रोन के खतरों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और उन्हें बेअसर करने की ट्रेनिंग लेने में मदद करेगा।
‘युद्ध अभ्यास’ में कमांड पोस्ट एक्सरसाइज़, फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज़ और कंबाइंड लाइव-फायर डेमोंस्ट्रेशन जैसे चरण शामिल हैं। इसका मकसद सिर्फ़ हथियारों की ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि कमांड, कम्युनिकेशन, फायर सपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं में दोनों सेनाओं के बीच तालमेल (interoperability) को बेहतर बनाना भी है।इसे भी पढ़ें: UCC पर Sanjay Jha जल्द मिलेंगे Amit Shah से, 14 सितंबर की रात तक की मुख्य खबरें
इससे भी अहम बात यह है कि यह अभ्यास दोनों सेनाओं को अपनी नई टेक्नोलॉजी, हथियार प्रणालियों और युद्ध के अनुभव को साझा करने का मौका देता है। ‘युद्ध अभ्यास’ का यह संस्करण यह भी दिखाता है कि आधुनिक युद्ध कैसे बदल रहा है, जिसमें संघर्षों के दौरान ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, सटीक हमले और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन अहम भूमिका निभा रहे हैं। US एंबेसडर सर्जियो गोर भी इस एक्सरसाइज़ के अहम ट्रेनिंग इवेंट्स में हिस्सा लेने वाले हैं, जो भारत और US के बीच बढ़ते डिफेंस सहयोग का संकेत है। US आर्मी के मुताबिक, उनकी मौजूदगी दोनों देशों के बीच डिफेंस पार्टनरशिप को दिखाती है।
‘युद्ध अभ्यास’ 2026 क्यों अहम है?
भारत और US के बीच ‘युद्ध अभ्यास’ सीरीज़ 2004 में शुरू हुई थी और तब से यह हर साल होने वाली दोनों देशों की जॉइंट एक्सरसाइज़ बनी हुई है, जिसकी मेज़बानी बारी-बारी से दोनों देश करते हैं। हालांकि, 2026 का एडिशन खास तौर पर अहम है क्योंकि पहली बार इसमें हिमालय से लेकर राजस्थान तक, अलग-अलग तरह के कॉम्बैट सिनेरियो (लड़ाई की स्थितियों) को एक ही एक्सरसाइज़ में शामिल किया गया है।इसे भी पढ़ें: Bihar Flood से 50 लाख लोग प्रभावित, Mallikarjun Kharge और Rahul Gandhi ने राहत कार्य में जुटने की अपील की
दूसरे शब्दों में, जहां एक्सरसाइज़ का एक हिस्सा पाकिस्तान बॉर्डर के पास राजस्थान के खुले रेगिस्तानी इलाके में हो रहा है, वहीं दूसरा हिस्सा चीन बॉर्डर के पास उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी इलाके में किया जा रहा है। इस बार, भारतीय और US सेनाएं दो अलग-अलग ऑपरेशनल इलाकों में अपनी जॉइंटनेस, इंटरऑपरेबिलिटी और मॉडर्न कॉम्बैट क्षमताओं को परख रही हैं।
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