कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत में इसी साल से दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक (आरईपीएम) का उत्पादन शुरू हो जाएगा, जो इलेक्ट्रिक वाहन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम होगा।
दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन, पवन चक्कियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, वैमानिकी और रक्षा क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ बन रहा है
रेड्डी ने यहां उद्योग मंडल फिक्की और खान मंत्रालय की तरफ से आयोजित सम्मेलन में कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत सरकार दु्र्लभ पृथ्वी तत्वों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा, “इस क्रम में इसी साल भारत में स्थायी चुंबकों का उत्पादन शुरू हो जाएगा।”
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत नियोडिमियम और प्रासियोडिमियम जैसे दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
गुजरात सरकार ने इस दिशा में कार्य शुरु किया
खान मंत्रालय ने इसके लिए अन्वेषण ब्लॉकों की नीलामी करने के साथ पुनर्चक्रण सुविधाओं को भी मंजूरी दी है।
फिलहाल भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए पर्याप्त इकाइयों की कमी है और यह एक बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के लिए सरकार आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और गुजरात में महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संयंत्र पार्क स्थापित करने की तैयारी में है।
रेड्डी ने कहा कि गुजरात सरकार ने इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है, जबकि आंध्र प्रदेश भी आगे बढ़ने को तैयार है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही ओडिशा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों से भी इन संयंत्रों की स्थापना पर चर्चा करेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि पूर्ण मूल्य संवर्धन शृंखला विकसित नहीं की गई तो भारत प्रसंस्कृत महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अन्य देशों पर निर्भर बना रहेगा।
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