लगातार दो ओलंपिक पदक जीत चुकी भारतीय पुरूष हॉकी टीम शनिवार को वेल्स के खिलाफ अपने अभियान का आगाज करेगी। उसका लक्ष्य विश्व कप में 51 साल के पदक के सूखे को खत्म करना होगा।
भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा है कि टीम उसी मानसिकता और तैयारी के साथ उतरेगी जो पिछले दो ओलंपिक में थी। उन्होंने कहा ,” हमें यकीन है कि जिस तरह से तोक्यो में 41 साल बाद ओलंपिक पदक जीता था, इस बार विश्व कप में 51 साल की कमी पूरी कर देंगे। हम उसी जज्बे, उसी सोच और तैयारी के साथ यहां आये हैं। विश्व कप में पदक जीतने का दबाव नहीं है बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा ,” हमने शीर्ष टीमों के खिलाफ लगातार खेला है और युवा खिलाड़ी भी आत्मविश्वास से ओतप्रोत हैं। अच्छी बात यह भी है कि पिछले कुछ टूर्नामेंटों में हमने काफी फील्ड गोल किये है।”
भारत ने राजगीर में एशिया कप जीता लेकिन प्रो लीग के पिछले सत्र में नौ टीमों में सिर्फ पाकिस्तान के ऊपर आठवें स्थान पर रही। विश्व कप से ठीक पहले हालांकि प्रो लीग के यूरोप चरण में भारत ने मौजूदा विश्व और यूरोपीय चैम्पियन जर्मनी को हराया और ओलंपिक चैम्पियन नीदरलैंड को भी मात दी। कोच क्रेग फुल्टोन ने प्रो लीग 2025-26 में 33 खिलाड़ियों को आजमाने के बाद विश्व कप टीम चुनी जिसमें भारत के लिये सर्वाधिक 417 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके दिग्गज मिडफील्डर मनप्रीत सिंह भी हैं तो यशदीप सिवाच, मोहित एचएस, शिलानंद लाकड़ा समेत आठ खिलाड़ियों का यह पहला विश्व कप होगा।
विश्व कप से पहले स्विटजरलैंड में बूट कैंप में विषम परिस्थितियों का सामना करके मानसिक दृढता के साथ आई भारतीय टीम के मानसिक कोच पैडी अपटन का मानना है कि पदक के बारे में अभी से सोचने की बजाय मैच दर मैच रणनीति बनाई जायेगी। विश्व कप 2011 जीतने वाली क्रिकेट टीम और पेरिस ओलंपिक 2024 में कांस्य पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के साथ काम कर चुके अपटन ने कहा ,” हमने इस टीम को हर हालात का सामना करने के लिये शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया है। पदक तक के सफर की चुनौतियों का सामना करने में यह टीम सक्षम है और मुझे यकीन है कि ओलंपिक के बाद विश्व कप का भी पदक जीत सकती है।”
पी आर श्रीजेश के संन्यास के बाद यह पहला बड़ा टूर्नामेंट है और युवा गोलकीपरों मोहित एचएस तथा सूरज करकेरा के सामने चुनौती आसान नहीं होगी। वहीं डिफेंस में अमित रोहिदास और कप्तान हरमनप्रीत सिंह का अनुभव काम आयेगा जिनकी ड्रैग फ्लिक पर भी भारत के गोलों का दारोमदार रहेगा। मनप्रीत और हार्दिक सिंह जैसे भरोसेमंद खिलाड़ी मिडफील्ड की कमान संभालने के लिये हैं तो फॉरवर्ड पंक्ति में अभिषेक और मनदीप पर नजरे रहेंगी जो 300 अंतरराष्ट्रीय मैचों से सिर्फ 12 मैच दूर हैं।
अपनी मेजबानी में हुए पिछले दो विश्व कप में छठे और आठवें स्थान पर रही भारतीय टीम के लिये विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन टॉनिक का काम करेगा जिसकी जरूरत उसे अगले महीने एशियाई खेलों में पड़ेगी जहां स्वर्ण पदक जीतकर लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करना लक्ष्य है। मैदान पर अच्छा प्रदर्शन टूर्नामेंट से ठीक पहले मैदान के बाहर हुए कई विवादों को हाशिये पर रखने के लिये भी जरूरी है।
दूसरी ओर भारत में पिछले विश्व कप में पदार्पण के बाद लगातार दूसरा टूर्नामेंट खेल रही वेल्स टीम की नजरें उलटफेर करने पर लगी होंगी। विश्व हॉकी के मानचित्र पर खुद को स्थापित करने की कोशिश में जुटी वेल्स टीम ने इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया और स्पेन के खिलाफ अभ्यास मैच खेलकर विश्व कप की तैयारी की है और उसे पिछले प्रदर्शन से बेहतर की उम्मीद है।
पूल चरण में भारत को 17 अगस्त को इंग्लैंड से और 19 अगस्त को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से खेलना है।
भाषा मोना सुधीर
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