रूस ने आयात किए 1.72 लाख टन ऑयल प्रोडक्ट
रूस की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वाडिनार रिफाइनरी ने 2026 के पहले 8 महीनों में अपनी जरूरत का पूरा कच्चा तेल रूस से हासिल किया। ऐसे में एक दिलचस्प स्थिति बनती है, जहां रूस का कच्चा तेल भारत पहुंचता है, यहां रिफाइन होकर ईंधन बनता है और फिर वही ईंधन रूस वापस भेजा जाता है। रूस की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव बढ़ने के कारण इस तरह के कारोबार को बढ़ावा मिला है।
पहले स्थान पर चीन
दूसरी ओर अगस्त में भारत की ओर से रूस से कच्चे तेल की खरीद में भी कमी आई। भारत का रूसी तेल आयात जुलाई के रिकॉर्ड स्तर से करीब 25% घटकर 4.1 अरब यूरो रह गया। इसके बावजूद भारत रूस के फॉसिल फ्यूल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। चीन करीब 8.4 अरब यूरो के आयात के साथ पहले स्थान पर रहा। अगस्त में भारत की रूस से कुल हाइड्रोकार्बन खरीद करीब 4.8 अरब यूरो रही, जिसमें कच्चे तेल की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा थी।
अगस्त में कीमत बढ़कर करीब 69.9 डॉलर प्रति बैरल
रूसी Urals क्रूड की औसत कीमत भी अगस्त में बढ़कर करीब 69.9 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो जुलाई के मुकाबले लगभग 23% ज्यादा थी। वहीं, ब्रेंट (Brent) के मुकाबले यूराल (Urals) क्रूड का डिस्काउंट करीब 22 डॉलर प्रति बैरल बना रहा। CREA का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से जुड़ी सप्लाई चैन की समस्याओं ने रूस के तेल और गैस निर्यात से होने वाली कमाई को भी बढ़ाया है। ऐसे में भारत-रूस ऊर्जा कारोबार अब सिर्फ कच्चे तेल की खरीद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रिफाइंड फ्यूल की सप्लाई भी दोनों देशों के बीच व्यापार का अहम हिस्सा बनती जा रही है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.