भारतीय तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम, प्रिथिका प्रदीप और चिकिथा तनीपार्थी की तिकड़ी को शनिवार को यहां विश्व कप के चौथे चरण की महिला कंपाउंड टीम स्पर्धा के फाइनल में मजबूत कोलंबिया से 228-232 से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
इस रजत पदक के साथ भारत ने सत्र के अंतिम टूर्नामेंट में अपना खाता खोला। भारतीय दल को दिन में बाद में होने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या बढ़ाने की उम्मीद है।
किशोर तीरंदाज प्रिथिका ने महिला कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा के सेमीफाइनल में भी जगह बना ली है और अब उन्हें दोहरा पदक जीतने के लिए केवल एक और जीत की जरूरत है।
भारत रिकर्व वर्ग में भी दो पदकों की दौड़ में बना हुआ है। एक अन्य किशोर तीरंदाज कीर्ति शर्मा भी दोहरा पदक जीतने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
कीर्ति शर्मा रिकर्व मिश्रित टीम के कांस्य पदक मुकाबले में भारत के नंबर एक तीरंदाज धीरज बोम्मदेवरा के साथ उतरेंगी। साथ ही कीर्ति महिला व्यक्तिगत स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंच चुकी हैं तो एक और जीत से उनका एक और पदक सुनिश्चित हो जाएगा।
महिला कंपाउंड टीम रैंकिंग में दुनिया की तीसरे नंबर की भारतीय टीम ने अप्रैल में मैक्सिको के पुएब्ला में आयोजित तीरंदाजी विश्व कप के पहले चरण में स्वर्ण पदक जीता था। हालांकि इस बार वह दुनिया की 14वें नंबर की कोलंबिया के सामने कोई खास चुनौती पेश नहीं कर सकी। कोलंबियाई टीम ने शानदार वापसी करते हुए पूरे दबदबे के साथ खिताब अपने नाम किया।
सत्रह वर्षीय प्रिथिका ने छह बार 10 अंक का निशाना लगाया। हालांकि टीम की सबसे बड़ी निराशा अनुभवी ज्योति सुरेखा वेन्नम का खराब प्रदर्शन से हुई जिन्होंने अपने आठ तीरों में केवल तीन बार 10 अंक हासिल किए जिससे भारत मुकाबले में प्रभावी चुनौती नहीं दे सका।
कोलंबिया की ओर से अलेजांद्रा उस्कियानो ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए लगातार आठ बार 10 अंक का निशाना साधा और यही दोनों टीमों के बीच सबसे बड़ा अंतर साबित हुआ।
दुनिया की सातवें नंबर और पूर्व विश्व चैंपियन सारा लोपेज का प्रदर्शन अपेक्षाकृत उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन उस्कियानो की शानदार तीरंदाजी की बदौलत कोलंबिया पूरे मुकाबले में नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहा।
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