जनरल द्विवेदी ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए उसे कड़ा संदेश देते हुए कहा कि भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना पूरी तरह तैयार हैं। यदि हालात दोबारा बिगड़ते हैं तो “ऑपरेशन सिंदूर 2.0” के लिए तीनों सेनाएं चौबीसों घंटे तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध की चुनौतियों को देखते हुए सेनाओं के बीच तालमेल और सामरिक क्षमता को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
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हम आपको बता दें कि सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज का युद्धक्षेत्र पूरी तरह पारदर्शी हो चुका है, जहां हर गतिविधि पर विरोधी की नजर रहती है। ऐसे में सैनिकों की तैनाती, सैन्य संसाधनों के उपयोग और सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक सतर्कता बरतना आवश्यक है। सेना प्रमुख ने सूचना युद्ध को भी आज के दौर का महत्वपूर्ण हथियार बताया। उनका कहना था कि सूचना युद्ध तभी सफल होता है जब पूरा देश एकजुट होकर सही जानकारी पर भरोसा करे। उन्होंने कहा कि जिस राष्ट्र के नागरिक, सेना और सभी हितधारक एक-दूसरे पर विश्वास करते हैं, वह किसी भी संघर्ष में विजय हासिल कर सकता है।
हम आपको बता दें कि सेना प्रमुख पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में 150वें पाठ्यक्रम की पासिंग आउट परेड की समीक्षा करने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। खेत्रपाल परेड मैदान में आयोजित इस भव्य समारोह में 355 कैडेट भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल हुए। यह अवसर इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि जनरल द्विवेदी स्वयं राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 65वें पाठ्यक्रम के पूर्व छात्र रहे हैं और कभी इसी परिसर में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। उनके लिए यह अपने पुराने संस्थान में सेना प्रमुख के रूप में वापसी का गौरवपूर्ण क्षण था।
समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेटों ने भी अपनी सफलता का श्रेय राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के अनुशासित वातावरण, वरिष्ठों के मार्गदर्शन और माता-पिता के सहयोग को दिया। परेड के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों की हवाई शक्ति का भी शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। सुखोई लड़ाकू विमान, चेतक हेलीकाप्टर, सारंग हेलीकाप्टर दल और आकाशगंगा स्काइडाइविंग दल ने अपनी सटीकता और कौशल का प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों का उत्साह बढ़ा दिया। वहीं आज सशस्त्र बलों में शामिल हुए कैडेटों ने इसे अपने लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताया।
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