डीजल की मांग बढ़ी
एक्सपर्ट के अनुसार इस बार मानसून देर से आने के कारण किसानों को बुवाई के दौरान डीजल से चलने वाले पंपों का अधिक इस्तेमाल करना पड़ा, जिससे डीजल की मांग बढ़ गई। आमतौर पर बारिश के मौसम में ईंधन की खपत घटती है, लेकिन इस बार कृषि जरूरतों ने मांग को सहारा दिया। वहीं जून की तुलना में जुलाई में डीजल बिक्री 9.2% कम रही, क्योंकि जून में छुट्टियों के दौरान सड़क यात्रा अधिक होती है।
ATF की डिमांड भी जुलाई में 2.9% बढ़ी
हवाई यात्रा से जुड़ा एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) भी जुलाई में 2.9% बढ़कर करीब 6.60 लाख टन पहुंच गया। हालांकि जून की तुलना में इसकी बिक्री 4.6% कम रही, लेकिन सालाना आधार पर इसमें अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जो लगातार बढ़ रही हवाई यात्राओं का संकेत देती है।
एलपीजी की मांग में सबसे बड़ा बदलाव
सबसे बड़ा बदलाव एलपीजी की मांग में देखने को मिला। जुलाई में एलपीजी की बिक्री 17.4% घटकर 23.7 लाख टन रह गई। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान सप्लाई प्रभावित होने के बाद कई होटल, रेस्टोरेंट और औद्योगिक उपभोक्ताओं ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। अब सप्लाई सामान्य होने के बावजूद इनमें से कई उपभोक्ता एलपीजी पर लौटने के बजाय PNG का ही इस्तेमाल जारी रखे हुए हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले समय में व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों में पाइप्ड गैस का उपयोग और बढ़ सकता है। अगर ऐसा होता है, तो एलपीजी की मांग पर दबाव बना रह सकता है, जबकि पेट्रोल और डीजल की खपत देश की आर्थिक गतिविधियों और कृषि जरूरतों के अनुसार आगे भी मजबूत बनी रह सकती है।
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