क्यों खोला गया है यह सेंटर?
यह केंद्र फ्रांस और भारत के विशेषज्ञों को एकजुट कर एआई आधारित रिसर्च, मेडिकल शिक्षा और नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा देगा. यहां चिकित्सा, इंजीनियरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बेजोड़ संगम देखने को मिलेगा, जिनके द्वारा हेल्थ के क्षेत्र में नई-नई खोज और जटिल सवालों के जवाब ढूंढे जाएंगे.
इन क्षेत्रों में होगा काम
. मस्तिष्क स्वास्थ्य (Brain Health)
. डिजिटल हेल्थ सिस्टम
. एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (दवाओं का कम असर होना)
बता दें कि इसका शुभारंभ RUSH 2026 नाम के एक बड़े एकेडमिक कार्यक्रम के दौरान हुआ. जब इंडो-फ्रेंच फोरम: एआई इन ब्रेन हेल्थ एंड ग्लोबल हेल्थकेयर सत्र आयोजित किया गया था. इस दौरान वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और नीति-निर्माताओं ने एआई के जिम्मेदार उपयोग पर चर्चा की थी.
क्या बोले, राष्ट्रपति मैक्रों
इंडो-फ्रेंच सेंटर को लेकर राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर ऐसे एआई सिस्टम बनाना चाहते हैं जो अपने संसाधनों और प्रतिभा पर आधारित हों. उन्होंने यह भी कहा कि एआई का उपयोग मानवता की भलाई के लिए होना चाहिए. बच्चों की सुरक्षा, एआई सिस्टम में पारदर्शिता, पक्षपात और गलत उपयोग से बचाव, भाषा और सांस्कृतिक विविधता की रक्षा के अलावा युवाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है.मैंक्रों ने एम्स परिसर का दौरा भी किया.
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