इसे भी पढ़ें: पीएम मोदी बोले, चंडीगढ़ सिर्फ़ शहर नहीं, भारत का Development Model, दी 4700 Cr की सौगात
जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन दो घंटे में तय करेगी। इस दौरान यह 12 स्टेशनों पर रुकेगी।
ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद प्रधानमंत्री ने 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं और उनकी आधारशिला भी रखी।
इसके बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने हाइड्रोजन चालित ट्रेन को ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का एक सफल उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि आज भारतीय रेलवे ने एक बड़ा कदम उठाया है और जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली यह हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन चालित ट्रेन है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते बड़ी मात्रा में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी गैस और उर्वरकों की आपूर्ति होती है।
इसे भी पढ़ें: Devshayani Ekadashi 2026: 25 जुलाई से बदलेगा इन 3 राशियों का भाग्य, करियर में होगा बड़ा उछाल
उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार महीनों से यह मार्ग लगातार संघर्ष का क्षेत्र बना हुआ है।
मोदी ने कहा कि युद्ध और तेल संकट के बावजूद भारत की रेलवे और देश के विकास की रफ्तार नहीं रुकी है।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि ऐसी स्थिति 2014 से पहले उत्पन्न हुई होती, तो भारतीय रेलवे का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया होता।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि जींद की उनकी यात्रा ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यहां जो स्नेह मिला है, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता।’’
उन्होंने कहा कि जींद का घी और घेवर वर्षों से नहीं बदले हैं, लेकिन इसके ‘तेवर’ जरूर बदल गए हैं। उन्होंने कहा कि जींद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सुशासन का एक मॉडल बनता जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जब भी हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र होगा, तब जींद, सोनीपत और हरियाणा का नाम लिया जाएगा। मैं इसके लिए पूरे देश को बधाई देता हूं।’’
आसमानी और सफेद रंग की आकर्षक डिजाइन वाली यह ट्रेन ‘हाइड्रोजन फ्यूल सेल’ प्रौद्योगिकी से संचालित होती है।
इस तकनीक में हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित किया जाता है, जिससे ट्रेन को चलाने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया में अवशेष के तौर पर सिर्फ जल-वाष्प निकलती है, जिसके दौरान कार्बन का उत्सर्जन बिल्कुल नहीं होता है।
डीजल ट्रेनों की तुलना में हाइड्रोजन चालित ट्रेनों से गैसों का उत्सर्जन नहीं होता, ये जीवाश्म ईंधन और उसके आयात पर निर्भरता घटाती हैं तथा काफी कम शोर के साथ संचालित होती हैं।
बिजली से चलने वाली पारंपरिक ट्रेनों के विपरीत, इस ट्रेन के संचालन के लिए पूरी रेल लाइन पर ओवरहेड विद्युतीकरण अवसंरचना की आवश्यकता नहीं होती। इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल के माध्यम से ट्रेन के भीतर ही बिजली का उत्पादन किया जाता है, जिससे यह स्वच्छ और अधिक दक्ष परिवहन विकल्प बन जाती है।
हरित हाइड्रोजन के उपयोग से जीवाश्म ईंधन आधारित ताप विद्युत संयंत्रों से उत्पादित बिजली पर निर्भरता भी घटती है, जिससे भारत के टिकाऊ परिवहन की दिशा में परिवर्तन को बल मिलता है।
भारत की इस हाइड्रोजन ट्रेन में 10 डिब्बे हैं, जिससे यह अब तक विकसित सबसे लंबी हाइड्रोजन चालित यात्री ट्रेनों में शामिल हो गई है।
इसका 3,200 हॉर्सपावर (एचपी) की क्षमता वाला प्रणोदन तंत्र इसे दुनिया में वर्तमान में परिचालन में मौजूद सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन चालित यात्री ट्रेनों में से एक बनाता है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.