रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका अब और सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। अमेरिकी सीनेट में एक नया बिल पेश किया गया है, जिसमें भारत, चीन समेत पांच देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और भारतीय निर्यात पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे लागू होने से पहले अमेरिकी संसद की पूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए इस बिल के तहत भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान जैसे देशों पर 100% आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। अमेरिका का कहना है कि ये देश रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं, जिससे रूस को आर्थिक मदद मिलती है और यूक्रेन युद्ध के लिए उसे राजस्व प्राप्त होता है। आपको बता दें कि, हाल ही में अमेरिका ने ब्राजील से आने वाले कई सामानों पर 25% टैरिफ लगा दिया है।
रूस पर दबाव बढ़ाने की रणनीति
इस विधेयक का उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाना है। प्रस्ताव में रूस के राजनीतिक नेतृत्व, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि इससे रूस की आय कम होगी और उस पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ेगा।
यूरोपीय देशों को मिली छूट
दिलचस्प बात यह है कि इस प्रस्ताव में कुछ यूरोपीय देशों को राहत दी गई है। जिन देशों की रूस से प्राकृतिक गैस की खरीद रूस के कुल गैस निर्यात का 15% से कम है और जो अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं, उन्हें इस टैरिफ से छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।
हर 180 दिन में होगी समीक्षा
बिल के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव हर 180 दिनों में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों की समीक्षा करेगा। अगर किसी देश की खरीद में बदलाव होता है तो उसके अनुसार टैरिफ दरों में भी संशोधन किया जा सकेगा।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
यदि यह विधेयक भविष्य में कानून बनता है, तो भारत से अमेरिका जाने वाले कई उत्पादों पर एक्स्ट्रा शुल्क लग सकता है। इससे भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है और कुछ क्षेत्रों में व्यापार प्रभावित हो सकता है। हालांकि, फिलहाल यह केवल प्रस्तावित बिल है और इसके लागू होने से पहले कई स्तरों पर चर्चा और मंजूरी जरूरी होगी।
इनपुट- PTI
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