सरकार की रणनीति का सबसे बड़ा आधार कृषि और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर है। कृषि क्षेत्र में सिंचाई, आधुनिक तकनीक, डिजिटल खेती, फसल विविधीकरण, भंडारण और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए ‘मेक इन इंडिया’, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, पीएम गतिशक्ति, नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी और नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम जैसी योजनाएं लागू की गई हैं। इनका उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, विदेशी निवेश आकर्षित करना, रोजगार पैदा करना और भारतीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर को भी आर्थिक विकास का मजबूत आधार मान रही है। इसी वजह से MSME के लिए लोन गारंटी बढ़ाने, इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी स्कीम, MSME की नई परिभाषा, TReDS प्लेटफॉर्म को मजबूत बनाने, आसान उद्यम रजिस्ट्रेशन, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) तक बेहतर पहुंच और पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी कई पहल की गई हैं। इन कदमों से छोटे कारोबारियों को पूंजी और बाजार दोनों तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।
सर्विस सेक्टर को मजबूत करने के लिए भी सरकार बड़े कदम उठा रही है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), मेडिकल वैल्यू ट्रैवल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल इकोसिस्टम और स्किल डेवलपमेंट पर खास जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय बजट 2026-27 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी, रीजनल मेडिकल हब, एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल संस्थानों का विस्तार, AVGC (Animation, Visual Effects, Gaming and Comics) कंटेंट क्रिएटर लैब और विश्वविद्यालय टाउनशिप जैसी नई योजनाओं की भी घोषणा की गई है।
सरकार का मानना है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। इसलिए सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) लगातार बढ़ाया जा रहा है। साथ ही FDI नियमों में उदारीकरण, निर्यात बढ़ाने, बेहतर लॉजिस्टिक्स, कर प्रणाली में सुधार और महंगाई को नियंत्रित रखने जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा भारत लगातार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) का दायरा बढ़ाकर वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले समय में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोफार्मास्यूटिकल्स, रेयर अर्थ मिनरल्स, केमिकल्स, कैपिटल गुड्स, क्लीन एनर्जी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर भारत की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख इंजन बनेंगे। इन सेक्टर के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से PM-SETU (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs) योजना भी शुरू की गई है, ताकि युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार किया जा सके।
राज्यसभा में एक अन्य सवाल के जवाब में निर्मला सीतारमण ने बैंकों की रिकवरी पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि FY25 में SARFAESI Act, 2002 के तहत बैंकों ने 2,15,709 मामले दर्ज किए, जिनमें 1.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि शामिल थी। इनमें से बैंकों ने 32,466 करोड़ रुपये की वसूली करने में सफलता हासिल की।
सरकार का विश्वास है कि कृषि, उद्योग, सेवाओं, डिजिटल तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास पर एक साथ काम करके भारत FY29 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल कर सकता है। अगर ये योजनाएं तय गति से आगे बढ़ती रहीं, तो भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है तथा ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को साकार करने की दिशा में बड़ी छलांग लगा सकता है।
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