प्रसाद राव करीब 18 वर्षों का भर्ती अनुभव रखते हैं और उन्होंने Google India में टीम बनाने के साथ-साथ Uber और Walmart जैसी कंपनियों में भी काम किया है।
सिर्फ B.Tech से इंटरव्यू नहीं मिलेगा’
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पॉडकास्ट के दौरान जब प्रसाद राव से पूछा गया कि अगर किसी उम्मीदवार के रिज्यूमे में B.Tech की डिग्री न हो, तो क्या यह उनके लिए चिंता की बात होगी, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। बैचलर डिग्री होना जरूरी है, लेकिन खास तौर पर B.Tech होना जरूरी नहीं है। सिर्फ B.Tech की डिग्री आपको इंटरव्यू नहीं दिला सकती।”
राव ने समझाया कि किसी प्रतिष्ठित कॉलेज से पढ़ाई करने का फायदा यह हो सकता है कि उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में प्रवेश कर जाए, लेकिन यह केवल शुरुआत होती है। इसके बाद कंपनियां यह देखती हैं कि उम्मीदवार वास्तविक समस्याओं को हल करने में कितना सक्षम है। उनके मुताबिक, कई छात्र यह मान लेते हैं कि IIT का टैग या इंजीनियरिंग की डिग्री अपने आप अच्छे अवसर दिला देगी। जबकि वास्तविकता यह है कि रिक्रूटर्स कॉलेज के नाम से आगे बढ़कर उम्मीदवार की स्किल्स, प्रोजेक्ट्स, समस्या-समाधान की क्षमता और उसके काम के प्रभाव (Impact) को ज्यादा महत्व देते हैं।
इन उपलब्धियों वाले रिज्यूमे ने तुरंत खींचा ध्यान
पॉडकास्ट के दौरान प्रसाद राव ने कई उम्मीदवारों के नाम छिपाकर उनके रिज्यूमे की समीक्षा की और बताया कि सैकड़ों आवेदनों को देखते समय रिक्रूटर्स किस तरह सोचते हैं। एक रिज्यूमे ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने कहा, उसे पढ़ने के लिए आगे बढ़ने की भी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ी। राव के मुताबिक, उस रिज्यूमे में सबसे पहले जिन उपलब्धियों ने उनका ध्यान खींचा, उनमें ” को-फाउंडर”, “ICPC Regionalist”, ” मेटा हैकर कैप” और ” गोल्ड मेडलिस्ट” जैसे शब्द शामिल थे। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि उम्मीदवार में पहल करने की क्षमता, प्रतिस्पर्धी माहौल में बेहतर प्रदर्शन और समस्या समाधान की मजबूत योग्यता है। रिज्यूमे देखने के बाद राव ने कहा, “मेरे लिए इतना काफी है कि मैं इस उम्मीदवार को इंटरव्यू के लिए आगे बढ़ा दूं।”
एक अन्य उम्मीदवार के बारे में बात करते हुए उन्होंने यहां तक कहा, “अगर मेरे पास भर्ती करने का अधिकार होता और उसके परिणाम की जिम्मेदारी भी मेरी होती, तो मैं बिना झिझक इस उम्मीदवार पर भरोसा करता।”
राव के अनुसार, सिर्फ लंबे-लंबे दावे करने से बेहतर है कि उम्मीदवार अपनी उपलब्धियों और कौशल के ठोस प्रमाण पेश करे। रिक्रूटर्स ऐसे रिज्यूमे को अधिक महत्व देते हैं, जिनमें वास्तविक उपलब्धियां और उनके स्पष्ट सबूत दिखाई देते हैं।
फेल स्टार्टअप भी बन सकता है प्लस पॉइंट
राव का मानना है कि अगर किसी उम्मीदवार ने अपना स्टार्टअप शुरू करने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हुआ, तब भी यह उसके लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। उनके मुताबिक, स्टार्टअप शुरू करने के लिए हिम्मत, धैर्य और आत्मविश्वास की जरूरत होती है। ऐसे अनुभव से व्यक्ति बहुत कुछ सीखता है और यही अनुभव उसे दूसरी कंपनियों के लिए भी बेहतर उम्मीदवार बना सकता है।
छात्रों के लिए क्या है सबसे जरूरी सलाह?
बातचीत के अंत में प्रसाद राव ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने वाले छात्रों को कुछ अहम सलाह दी। उन्होंने कहा कि पहले साल में कुछ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज या नई टेक्नोलॉजी सीखकर संतुष्ट नहीं हो जाना चाहिए। छात्रों को लगातार नई चीजें सीखते रहना चाहिए और कंप्यूटर साइंस की बुनियादी अवधारणाओं (Fundamentals) को मजबूत बनाना चाहिए। राव ने यह भी कहा कि केवल किताबों तक सीमित रहने के बजाय इंटर्नशिप, हैकाथॉन, प्रतियोगी प्रोग्रामिंग, स्टार्टअप शुरू करने की कोशिश और वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करना चाहिए। उनके मुताबिक, आज के समय में रिक्रूटर्स के लिए सिर्फ डिग्री से ज्यादा मायने उम्मीदवार की स्किल्स, अनुभव और वास्तविक काम रखते हैं। यही चीजें नौकरी पाने की संभावना को मजबूत बनाती हैं।
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