आज दुनिया की चर्चित AI कंपनियों में शामिल Perplexity AI का नेतृत्व करने वाले श्रीनिवास के करियर में एक समय ऐसा भी था, जब उन्हें एक के बाद एक कई रिजेक्शन का सामना करना पड़ा।
IIT में नहीं मिली कंप्यूटर साइंस, यहीं से बदली राह
देश के हजारों इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों की तरह अरविंद श्रीनिवास का सपना भी IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करने का था। हालांकि, उन्हें मनचाही ब्रांच नहीं मिल सकी। इतना ही नहीं, ब्रांच बदलने के लिए जरूरी CGPA से वह सिर्फ 0.01 अंक से चूक गए। यह झटका उनके लिए निराशाजनक जरूर था, लेकिन उन्होंने इसे अपने करियर की अंतिम मंजिल नहीं माना। आगे चलकर यही सफर उन्हें AI और मशीन लर्निंग की दुनिया तक ले गया।
जब मशीन लर्निंग की क्लास ने भी कहा ‘नहीं’
श्रीनिवास के सामने चुनौतियां यहीं खत्म नहीं हुईं। उनके मुताबिक, शुरुआत में उन्हें मशीन लर्निंग के एक कोर्स में दाखिला देने से मना कर दिया गया था। एक प्रोफेसर का मानना था कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए इस विषय को समझना मुश्किल हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि जिस क्षेत्र में जाने से उन्हें कभी हतोत्साहित किया गया था, वही आगे चलकर उनके करियर की पहचान बन गया।
IIT मद्रास के बाद श्रीनिवास ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्केले से कंप्यूटर साइंस में PhD की। यहां उन्होंने डीप लर्निंग, रीइन्फोर्समेंट लर्निंग, कंप्यूटर विजन और जनरेटिव AI जैसे क्षेत्रों में रिसर्च की। इसी दौरान उन्होंने OpenAI, Google और DeepMind में इंटर्नशिप भी की और AI की उन तकनीकों पर काम किया, जो आज आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अहम हिस्सा हैं।
MIT ने भी कर दिया था रिजेक्ट
बर्कले जाने से पहले उन्होंने MIT में PhD के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनका आवेदन रिजेक्ट हो गया। हालांकि, उन्होंने इस फैसले को अपनी क्षमता का अंतिम फैसला नहीं माना और दूसरे संस्थान में अपनी रिसर्च जारी रखी। आखिरकार बर्कले उनके करियर का अहम प्लेटफॉर्म बना। यहीं से उनकी रिसर्च की राह आगे बढ़ी और उन्हें OpenAI तक पहुंचने का मौका मिला।
पहला स्टार्टअप भी हो गया था फेल
OpenAI में रिसर्च साइंटिस्ट के तौर पर काम करने के बाद भी श्रीनिवास को सफलता तुरंत नहीं मिली। Perplexity AI शुरू करने से पहले उन्होंने एक Twitter सर्च प्रोडक्ट बनाया था। बाद में X की API में हुए बदलावों के कारण यह प्रोडक्ट काम करना बंद कर गया और उनका पहला स्टार्टअप असफल हो गया।
कई उद्यमियों के लिए इस तरह का झटका आगे के प्रयासों से पीछे हटने की वजह बन सकता है। लेकिन श्रीनिवास ने इस असफलता को एक और सीख के तौर पर लिया और आगे बढ़ते रहे। अगस्त 2022 में उन्होंने Perplexity AI की सह-स्थापना की। उनका लक्ष्य एक ऐसा AI-पावर्ड आंसर इंजन तैयार करना था, जो लोगों को जानकारी सर्च करने, सीखने और अलग-अलग विषयों को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सके। कुछ ही वर्षों में Perplexity AI दुनिया की चर्चित AI कंपनियों में शामिल हो गई और श्रीनिवास AI की दुनिया के प्रमुख युवा टेक लीडर्स में गिने जाने लगे।
तेजी से बढ़ें, सीखते रहें
श्रीनिवास छात्रों से सिर्फ अच्छे नंबरों या बड़ी नौकरी के पद पर ध्यान देने के बजाय लगातार सीखने और आगे बढ़ते रहने पर जोर देते हैं। श्रीनिवास ने छात्रों को सलाह दी कि तेजी से आगे बढ़ें, नए प्रयोग करने से न डरें और हर चीज के बिल्कुल सही होने का इंतजार न करें। उनका मानना है कि जो लोग तेजी से कदम बढ़ाते हैं, वे तेजी से सीखते हैं, अपनी गलतियों से जल्दी उबरते हैं और आगे भी तेजी से विकास करते हैं।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.