ट्रिपलआईटी ने अपने एमटेक (M.Tech) कोर्सेज को पूरी तरह से नए स्वरूप में ढालने का निर्णय लिया है। छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसी भविष्य की तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल करने का मौका मिलेगा।
12 में से 10 कोर्सेज बदले नाम और स्वरूप
ट्रिपलआईटी में वर्तमान में संचालित होने वाले 12 पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) प्रोग्रामों में से 10 एमटेक कोर्स के नाम और उनके सिलेबस में बदलाव किया गया है। संस्थान का मानना है कि इन कोर्सेज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मानकों के अनुरूप बनाना जरूरी था, ताकि यहां से निकलने वाले छात्र दुनिया के किसी भी कोने में अपनी योग्यता का लोहा मनवा सकें।
संस्थान में मुख्य रूप से तीन विभागों—आईटी (IT), ईसीई (ECE) और एप्लाइड साइंसेज—के अंतर्गत ये कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इन तीनों ही विभागों में आधुनिक तकनीकों को प्राथमिकता दी गई है।
किस विभाग में क्या बदला?
1. ईसीई विभाग (ECE): इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग में अब सेमीकंडक्टर और संचार उद्योग की बढ़ती मांग को ध्यान में रखा गया है। इसके तहत अब छात्र एडवांस स्पेशलाइजेशन की पढ़ाई कर सकेंगे:
कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग
कम्युनिकेशन एंड सिग्नल प्रोसेसिंग
माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स एंड वीएलएसआई (VLSI)
ये विषय भविष्य में चिप निर्माण और उन्नत संचार प्रणालियों में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।
2. आईटी विभाग (IT): इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग में सबसे अधिक रोमांचक बदलाव देखने को मिले हैं। यहां अब ऐसे कोर्स शामिल किए गए हैं जो इंडस्ट्री 4.0 और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की नींव हैं। नए नामों और विशेषज्ञताओं में शामिल हैं:
एआई एंड मशीन लर्निंग
रोबोटिक्स एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन एंड इमर्सिव टेक्नोलॉजीज
सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग एंड ऑटोमेशन
नेटवर्क्स, सिस्टम्स एंड कंप्यूटिंग
छात्रों और उद्योगों के लिए क्या हैं फायदे?
इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि छात्रों को अब पुराने ढर्रे पर नहीं पढ़ना होगा। उन्हें वह सिखाया जाएगा जो आज की कंपनियां चाहती हैं। ‘इमर्सिव टेक्नोलॉजीज’ और ‘ऑटोमेशन’ जैसे विषय छात्रों को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करेंगे। संस्थान का यह कदम न केवल प्लेसमेंट के आंकड़ों को बेहतर बनाएगा, बल्कि भारत को तकनीक के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति बनाने में भी मदद करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए कोर्सेज के जरिए छात्रों को प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस अधिक मिलेगा, जिससे वे पढ़ाई पूरी करते ही सीधे उद्योगों में बड़ी जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार होंगे।
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