क्या आपने कभी सोचा है कि एक देश जो आकार में भारत के एक जिले जितना छोटा है वो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का सबसे भरोसेमंद साथी कैसे बन गया? लोग कहते हैं कि देशों के बीच कोई परमानेंट दोस्त नहीं होता। सिर्फ स्वार्थ होता है। लेकिन 1999 में जब कारगिल की पहाड़ियों पर हमारी पीठ में छुरा घुपा गया तब दुनिया के सुपर पावर्स हमें लेक्चर दे रहे थे। लेकिन एक देश था जिसने बिना शर्त अपने हथियारों के दरवाजे भारत के लिए खोल दिए। आज वही देश हरियाणा के खेतों में हमारे किसानों के हाथ में वो जादुई तकनीक दे रहा है जो बंजर जमीन से सोना उगा सकती है। कारगिल की चोटियों से लेकर मुनीमपुर के खेतों तक और असम की बाढ़ की विभीषका से लेकर दिल्ली के हाई प्रोफाइल ट्रेड रूम्स तक भारत और इजराइल की दोस्ती अब सिर्फ एक समझौता नहीं रह गई है। यह एक स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप बन चुकी है।
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दरअसल 26 जुलाई को जब भारत कारगिल विजय दिवस का जश्न मना रहा था। इस दिन हम उन जांबाजों को सलाम करते हैं जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर टाइगर हिल को वापस लिया था। लेकिन इस जीत के पीछे एक ऐसा साइलेंट पार्टनर था जिसका नाम इतिहास की किताबों में तो कम है लेकिन सेना के दस्तावेजों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। वो नाम है इजराइल का। 1999 के दौर को याद करिए जरा। भारत पर परमाणु परीक्षण के बाद बैन लगे थे। हमारे पास ऊंचाई पर बैठे दुश्मन को सटीक निशाना बनाने वाली तकनीक बिल्कुल नहीं थी। तब इजराइल ने क्या किया? वो मैं आपको अब बताता हूं एक-एक पॉइंट के जरिए। तो सबसे पहले इजराइल ने क्या किया? उसने ये किया। लेजर गाइडेड बम भारत को दिए। जब हमारे मिराज विमानों को आंखें चाहिए थी। तब इजराइल ने लाइटिंग पॉट्स मुहैया कराएं। 24 जून 1999 को टाइगर हिल पर जो हुआ वह पहला लेजा धमाका इसी दोस्ती का नतीजा था। अमेरिका और यूरोप यानी कि पश्चिम का भारी दबाव था भारत पर कि भारत को हथियार ना दिए जाए। लेकिन इजराइल ने अपनी शिपमेंट की दिशा नहीं बदली।
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ड्रोन क्रांति की शुरुआत
आज हम जिस ड्रोन युग में हैं उसकी नींव कारगिल में पड़ी थी। जब इजराइल ने सर्च और हेरोन ड्रोन देकर हमें पहाड़ियों के पीछे छिपे दुश्मन को देखने की ताकत दी थी। तो वहीं दूसरी तरफ इजराइली तकनीक आज ऑपरेशन सिंदूर और मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बन रही है। हम खरीददार से अब को डेवलपर यानी कि जिसे हम सह निर्माता कहते हैं वह बन चुके हैं। अब सरहद की सुरक्षा के बाद अब बात है देश के अन्नदाता की। 17 जून 2026 हरियाणा के झज्जर जिले का मुनीमपुर गांव एक ऐतिहासिक गवाह बना। यहां भारत और इजराइल के बीच 35वें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन हुआ। अब जरा दोषी का नया मॉडल भी समझ लीजिए। इजरायली राजदूत रूजार ने वहां जो कहा वो हर भारतीय को गर्व से भर देगा। उन्होंने कहा कि 30 साल पहले हम तकनीक लाते थे। लेकिन आज यह केंद्र भारतीय कंपनियों ने भारतीय सामान से खुद बनाया है। यह असली आत्मनिर्भर भारत है।
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