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सभा को संबोधित करते हुए गहलोत ने मौजूदा राजनीतिक माहौल पर तीखा हमला किया और इसे अपने दशकों लंबे सार्वजनिक जीवन में देखे गए सबसे चिंताजनक दौर में से एक बताया। गहलोत ने कहा कि अगर इंदिरा गांधी जैसी नेता आज जीवित होतीं, तो वह बीजेपी जैसी पार्टी पर प्रतिबंध लगा देतीं। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि आज का माहौल बेहद खतरनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक विमर्श धार्मिक ध्रुवीकरण से तय हो रहा है और सत्ता में बैठे लोगों पर समाज में जानबूझकर विभाजन को गहरा करने का आरोप लगाया।
गहलोत ने चुनावों में, खासकर उत्तर प्रदेश में, अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व को लेकर बीजेपी के नज़रिए पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि पार्टी मुस्लिम उम्मीदवार क्यों नहीं उतारती, और तर्क दिया कि सांकेतिक प्रतिनिधित्व से भी सबको साथ लेकर चलने की भावना को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि आप देश की जनता को दिखाने के लिए ही सही, पांच सीटें तो दे सकते थे। लेकिन आप यह दिखाना चाहते हैं कि आप पूरी तरह से हिंदुत्ववादी पार्टी हैं। कांग्रेस नेता ने बीजेपी पर पहचान की राजनीति पर बहुत ज़्यादा निर्भर रहने का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या सिर्फ़ एक विचारधारा के आधार पर शासन चलाया जा सकता है।
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बीजेपी ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत की टिप्पणियों को उकसाने वाला और कांग्रेस पार्टी की विचारधारा को दिखाने वाला बताया। पार्टी के प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि इन बयानों से कांग्रेस की हिंदुत्व के प्रति दुश्मनी ज़ाहिर होती है। पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हिंदुओं और हिंदुत्व से नफ़रत करती है। अशोक गहलोत का बयान इसका एक और उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही हिंदुत्व को जीवन जीने का एक तरीका मान चुका है और किसी राजनीतिक पार्टी पर प्रतिबंध लगाने के पूर्व मुख्यमंत्री के सुझाव पर सवाल उठाए।
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