क्रिकेट जगत से एक बड़ी खबर सामने आई, जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने क्रिकेट कनाडा की सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी। अहमदाबाद में आयोजित आईसीसी बोर्ड की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। आईसीसी के अनुसार क्रिकेट कनाडा ने सदस्यता से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों का गंभीर रूप से उल्लंघन किया है, जिसके चलते यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।
बता दें कि पिछले कुछ महीनों से क्रिकेट कनाडा विवादों में घिरा हुआ था। अप्रैल में कनाडाई प्रसारण निगम द्वारा प्रसारित एक वृत्तचित्र में संगठन के भीतर कथित भ्रष्टाचार, मैचों में हेरफेर और कुछ खिलाड़ियों व अधिकारियों से जुड़े हिंसा तथा धमकी के आरोपों को उजागर किया गया था। इसके बाद क्रिकेट कनाडा की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे थे।
मौजूद जानकारी के अनुसार आईसीसी बोर्ड ने फैसला लेते समय कनाडा के खिलाड़ियों के हितों को प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि निलंबन के बावजूद कनाडा की राष्ट्रीय पुरुष और महिला टीमें आईसीसी के सभी अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में हिस्सा ले सकेंगी। आईसीसी ने स्पष्ट किया है कि खिलाड़ियों को संगठनात्मक समस्याओं की वजह से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
गौरतलब है कि निलंबन के दौरान भी क्रिकेट कनाडा को आर्थिक सहायता मिलती रहेगी। हालांकि यह सहायता सीधे नहीं दी जाएगी, बल्कि आईसीसी प्रबंधन की निगरानी में नियंत्रित व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। यह राशि केवल राष्ट्रीय टीमों के स्वीकृत कार्यक्रमों और गतिविधियों पर ही खर्च की जा सकेगी।
आईसीसी ने यह भी बताया कि क्रिकेट कनाडा को सदस्यता बहाल कराने के लिए कुछ विशेष शर्तें पूरी करनी होंगी। इन शर्तों का उद्देश्य संगठन में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करना है। इन सुधारों की निगरानी आईसीसी की सामान्यीकरण समिति और प्रबंधन टीम द्वारा की जाएगी। सभी शर्तों के पूरी तरह संतोषजनक तरीके से लागू होने के बाद ही सदस्यता बहाल करने पर विचार किया जाएगा।
इसी बैठक में आईसीसी बोर्ड ने खेल से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलावों को भी मंजूरी दी है। खराब रोशनी के कारण खेल प्रभावित होने की समस्या को कम करने के लिए टेस्ट क्रिकेट में लाल गेंद की जगह गुलाबी गेंद के इस्तेमाल का परीक्षण किया जाएगा। हालांकि इसके लिए दोनों टीमों की सहमति जरूरी होगी। साथ ही मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के सहयोग से बेहतर प्रकाश व्यवस्था पर भी शोध किया जाएगा।
इसके अलावा अब निर्धारित पेय विराम के दौरान मुख्य प्रशिक्षक या उनके प्रतिनिधि मैदान में जाकर खिलाड़ियों से चर्चा कर सकेंगे। टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 15 मिनट का अनिवार्य मध्यांतर भी लागू किया जाएगा। वहीं संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन की जांच के दौरान मैच अधिकारियों को तकनीकी आंकड़ों तक पहुंच देने का भी फैसला लिया गया है।
क्रिकेट जानकारों का मानना है कि आईसीसी का यह कदम वैश्विक क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। साथ ही नए नियमों से खेल को अधिक आधुनिक और सुचारु बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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