हालांकि मेजबानी छिनने का असर श्रीलंका की टूर्नामेंट में भागीदारी पर भी पड़ सकता है। श्रीलंका क्रिकेट की परिवर्तन (ट्रांसफोर्मेशन) समिति के सचिव प्रकाश शाफ्टर ने ‘द संडे टाइम्स’ से कहा, ‘‘हां, इसे श्रीलंका से बाहर कर दिया गया है। यह किसी अन्य स्थान पर खेला जाएगा, लेकिन फिलहाल मुझे नहीं पता कि आयोजन कहां होगा।
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रिपोर्ट के मुताबिक, आईसीसी अपनी अगली बोर्ड बैठक में टूर्नामेंट के नए आयोजन स्थल का फैसला कर सकता है। श्रीलंका से मेजबानी छिने जाने से क्रिकेट बोर्ड को आर्थिक नुकसान भी होने की संभावना है। फिलहाल श्रीलंका क्रिकेट का प्रशासन सरकार द्वारा नियुक्त परिवर्तन समिति चला रही है।
इस समिति का गठन क्रिकेट बोर्ड में सुधार, संविधान में बदलाव और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, आईसीसी राजनीतिक रूप से नियुक्त अंतरिम प्रशासन को मान्यता नहीं देता और परिवर्तन समिति के कार्यभार संभालने के बाद से श्रीलंका क्रिकेट के प्रतिनिधियों को आईसीसी बोर्ड की बैठकों में शामिल होने की अनुमति भी नहीं दी गई है। जुलाई में जारी एक बयान में आईसीसी ने कहा था कि उसके बोर्ड को श्रीलंका क्रिकेट के बारे में संशोधित संविधान की दिशा में हुई प्रगति की जानकारी दी गई है।
आईसीसी ने जल्द से जल्द चुनाव कराने की जरूरत भी दोहराई थी और कहा था कि फिलहाल श्रीलंका क्रिकेट आईसीसी बोर्ड की बैठकों में प्रतिनिधित्व नहीं कर सकेगा। टूर्नामेंट का आयोजन श्रीलंका से बाहर होने के कारण उसकी महिला टीम के टूर्नामेंट से बाहर होने की संभावना भी बन गई है। मूल योजना के अनुसार टूर्नामेंट में शीर्ष पांच रैंकिंग वाली टीम और मेजबान देश शामिल होने थे।
फिलहाल श्रीलंका महिला टीम की रैंकिंग छठे स्थान पर है। यदि वह मेजबान नहीं रहती, तो उसकी सीधे टूर्नामेंट में जगह बनने की संभावना कम हो सकती है। यह पहली बार नहीं है जब आईसीसी ने श्रीलंका से किसी बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी छीनी है।
2023 में आईसीसी ने 2024 अंडर-19 विश्व कप की मेजबानी भी श्रीलंका से वापस ले ली थी। उस समय तत्कालीन खेल मंत्री ने श्रीलंका बोर्ड की निर्वाचित प्रशासनिक व्यवस्था को भंग करके एक अंतरिम समिति नियुक्त कर दी थी।
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