वैसे हरियाणा से देश को कई नामी पहलवान दिए हैं, मगर बल्कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में भी कई बेहतरीन अफसर भी इसी मिट्टी से निकले हैं। इन्हीं में से एक हैं आईएएस अधिकारी सिद्धार्थ जैन। इस वक्त वो मध्य प्रदेश के हरदा में जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
आईएएस सिद्धार्थ जैन
वैसे हरियाणा से देश को कई नामी पहलवान दिए हैं, मगर बल्कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में भी कई बेहतरीन अफसर भी इसी मिट्टी से निकले हैं। इन्हीं में से एक हैं आईएएस अधिकारी सिद्धार्थ जैन। इस वक्त वो मध्य प्रदेश के हरदा में जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों में से सबसे कम उम्र 33 वर्ष सिद्धार्थ जैन की है।
मध्य प्रदेश के युवा डीएम सिद्धार्थ जैन
वैसे, तो मध्य प्रदेश कैडर में हरसिमरनप्रीत कौर, प्रखर सिंह, श्रेयांस कुमट, वैशाली जैन, दलीप कुमार, हिमांशु प्रजापति और दिव्यांशु चौधरी जैसे आईएएस अधिकारी उम्र में आईएएस सिद्धार्थ जैन से छोटे हैं, मगर ये आईएएस वर्तमान में जिला कलेक्टर के पद पर तैनात नहीं हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश के सबसे युवा जिला कलेक्टर बनने का गौरव सिद्धार्थ जैन को ही हासिल है।
यूपीएससी में 13वीं रैंक
मध्य प्रदेश कैडर में सिद्धार्थ जैन 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 12 फरवरी 1993 को हुआ है। मूल रूप से वो हरियाणा के फरीदाबाद के रहने वाले हैं। सिद्धार्थ ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2015 में अखिल भारतीय स्तर पर 13वीं रैंक हासिल की थी। हालांकि यहां तक का सफर उनके लिए आसान नहीं था। बता दें कि यूपीएससी में यह उनका दूसरा प्रयास था।
बता दें कि सिद्धार्थ जैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने यूपीएससी की जर्नी शेयर की थी। उन्होंने लिखा था कि साल 2014 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी थी, तब वे मुख्य परीक्षा (Mains) पास नहीं कर सके थे।
लगातार बैठने से कमर में रहती थी कमर में दर्द, खाईं दवाइयां
उन्होंने आगे लिखा कि यूपीएससी के दूसरे प्रयास के दौरान वे लाइब्रेरी में कई-कई घंटों बैठकर पढ़ाई किया करते थे। लगातार बैठने की वजह से उन्हें गंभीर कमर दर्द की शिकायत रहने लगी थी। स्थिति यह थी कि उनके लिए आधे घंटे भी लगातार बैठना मुश्किल हो जाता था। ऐसे में वे अक्सर डरते थे कि यूपीएससी की तीन-तीन घंटे की लंबी परीक्षा में लगातार कैसे बैठ पाएंगे। उस दौर में उन्हें दर्द निवारक गोलियां लेनी पड़ती थीं। एक गोली सुबह की शिफ्ट की परीक्षा के लिए और दूसरी अगली शिफ्ट में दर्द के दौरान।
नहीं मानी हार
इतना ही नहीं जब पर परीक्षा हॉल में बैठें, तो उन्हें बेहद ही असुविधाजनक बेंच भी मिली। साथ ही एग्जाम केंद्र के पास के शोर-शराबे ने भी उन्हें खूब परेशान किया। हालांकि इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। नतीजा यह रहा कि दूसरे प्रयास में ही उन्होंने देशभर में 13वीं रैंक हासिल की, आईएएस सर्विस मिली और मध्य प्रदेश कैडर आवंटित हुआ।
22 की उम्र में IAS बने सिद्धार्थ जैन
बता दें कि सिद्धार्थ जैन काफी पढ़े-लिखे हैं। उनके पिता चार्टर्ड अकाउटेंट हैं और मां हाउसवाइफ हैं। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। बता दें कि सिद्धार्थ साल 2015 में यूपीएससी पास करके महज 22 साल की उम्र में आईएएस अधिकारी बन गए थे। उन्होंने 32 वर्ष की उम्र में जिला कलेक्टर का पद संभाल लिया था।
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