हंगरी के प्रधानमंत्री के रूप में शनिवार को पीटर मग्यार ने शपथ ली। इसी के साथ विक्टर ओर्बन के 16 वर्षों के निरंकुश शासन का अंत हो गया।
मग्यार की मध्य-दक्षिणपंथी टिस्ज़ा पार्टी ने एक आश्चर्यजनक उलटफेर में पिछले महीने ओर्बन की राष्ट्रवादी-लोकप्रिय फिडेज पार्टी को हराया था। हंगरी में साम्यवादी शासन के समाप्त होने के बाद किसी भी अन्य पार्टी की तुलना में मग्यार की पार्टी ने सबसे अधिक मत प्राप्त किये और संसद की सीटें जीतीं।
इस चुनाव में टिस्जा को संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला, जिससे वह उन कई नीतियों को वापस ले सकेगी, जिनके कारण ओर्बन को उनके आलोचक धुर दक्षिणपंथी सत्तावादी करार देते थे।
हंगरी की संसद में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मग्यार ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि वह अपने पद का इस्तेमाल हंगरी पर ‘‘शासन’’ करने के लिए नहीं, बल्कि ‘‘अपने देश की सेवा करने’’ के लिए करेंगे।
मग्यार ने कहा, ‘‘मैं यहां इसलिए नहीं खड़ा हूं क्योंकि मैं देश में किसी और से अलग हूं। मैं यहां इसलिए खड़ा हूं क्योंकि लाखों हंगरीवासियों ने बदलाव लाने का फैसला किया है। हमें जो विश्वास मिला है, वह हमारे लिए सम्मान और नैतिक दायित्व दोनों है, लेकिन साथ ही एक अद्भुत एहसास भी है।’’
माना जा रहा है कि मग्यार की सरकार आने से हंगरी के यूरोपीय संघ के साथ राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आएगा। पूर्व प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण निर्णयों पर बार-बार वीटो किया है, जिनमें हाल में पड़ोसी यूक्रेन को समर्थन देने से संबंधित निर्णय को वीटो करना शामिल है।
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