आज के समय में ज्यादातर घरों में खुद से दवाई लेने का चलन बढ़ गया है। बिना डॉक्टर के सलाह लोग खुद से दवाई का सेवन कर रहे हैं। हालांकि, डॉक्टर का कहना है कि इस तरह के दवाईयों का सेवन करने से आपको काफी नुकसान पहुंच सकता है। डॉक्टर कहते हैं कि इन दवाईयों के बार-बार खाने से आपकी इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है। यदि आपको एंटीबायोटिक दवाई लेने की आदत हैं, तो इस लेख का आज ही पढ़ें।
पेट का कनेक्शन- यहीं रहती है आपकी इम्यूनिटी
डॉक्टर कहते हैं कि हमारे शरीर का करीब 70 प्रतिशत इम्यून सिस्टम पेट (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट) में होता है। इस पेट में मौजूद करोड़ों ‘गुड बैक्टीरिया’ चलाते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहते हैं।
असल में जब कोई ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक लेते हैं, तो वह एक मिसाइल की तरह कार्य करती है। वह बीमारी फैलाने वाले बैड बैक्टीरिया को तो मारती ही है, लेकिन साथ ही हमारे पेट के गुड और मददगार बैक्टीरिया को भी पूरी तरह खत्म कर देती है।
बार-बार बीमारियों की चपेट में आते हैं आप
अगर आप बार-बार एंटीबायोटिक्स दवाई लेते हैं, तो पेट के गुड बैक्टीरिया को वापस ठीक होने का मौका नहीं मिलता है। डॉक्टरों की भाषा में इस असुंतलन को ‘डिस्बायोसिस’ कहा जाता है। इसी कारण से प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है। फिर बदलते मौसम के कारण बार-बार बीमारियों के चपेट में आप आ सकते हैं। बरसात के समय या फिर सर्दी के दौरान जुकाम-वायरल ( जैसे इन्फ्लूएंजा या डेंगू) हो सकता है। एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया को मारती हैं, वायरस पर इनका कोई असर नहीं होता है। इसलिए, वायरल बीमारी में इन्हे बेवजह खाने से शरीर सिर्फ एसिडिटी, पेट फूलना और दस्त जैसी समस्याएं परेशान करती है।
इतना ही नहीं, इंटरनल मेडिसिन के क्षेत्र में आज सबसे बड़ी चिंता एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की है। अगर आप गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेते हैं, तो थोड़ा ठीक महसूस होने पर दवा का कोर्स बीच में ही छोड़ देते हैं, तो इससे मजबूत बैक्टीरिया बच जाते हैं और खुद को म्यूटेट करते हैं। फिर यह सुपरबग्स बन जाते हैं। जिसका मतलब है कि भविष्य में किसी को टाइफाइड या यूरिन इंफेक्शन (यूटीआई) जैसी बीमारियां होंगी, तो ये आम और सस्ती दवाइयां असर करना बंद कर देती है।
परिवार की इम्यूनिटी को बचाने के तरीके
– बिना डॉक्टर के सलाह और चेकअप के कभी भी कोई मेडिसन खुद से न लें और एंटीबायोटिक का सेवन न करें।
– यदि आपके डॉक्टर ने दवा लिखी है, तो ठीक होने के बाद भी इसका कोर्स पूरा करें।
– असल में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल के दौरान या बाद में हमारे पारंपरिक भारतीय प्रोबायोटिक्स जैसे घर का बना दही, छाछ या फर्मेंटेड फूड जरुर खाएं, जिससे पेट के गुड बैक्टीरिया वापिस आ सकें।
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