Health Tips: ठंड में या लू चलने पर जब होंठ फटते थे तब घर के बड़े-बुजुर्ग सलाह देते थे, नाभि में सरसों का तेल लगा लो. ऐसा करने पर होंठ ठीक भी हो जाते. आयुर्वेद इस बात की पुष्टि करता है. दरअसल, नाभि को शरीर का अहम ऊर्जा केंद्र माना गया है. गर्भावस्था के दौरान नाभि के माध्यम से ही मां से शिशु को पोषण मिलता है. इसी कारण पुराने समय से नाभि पर तेल लगाने की सलाह दी जाती रही है. लेकिन, क्या नाभि पर सिर्फ सरसों तेल ही लगाना चाहिए? ऐसा नहीं है, नाभि पर कई तरह के तेल लगाए जा सकते हैं और सबसे अपने-अपने फायदे हैं. (रिपोर्ट: सावन पाटिल/खंडवा)
हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. अनिल पटेल के मुताबिक, नाभि के आसपास कई सूक्ष्म नसें और रक्त वाहिकाएं जुड़ी होती हैं. यहां हल्की मालिश करने से आराम का एहसास हो सकता है, लेकिन इसे किसी बीमारी का पक्का इलाज नहीं समझना चाहिए. कुछ लोगों को नाभि पर तेल लगाने से पाचन में हल्की राहत, त्वचा में नमी और मानसिक सुकून महसूस हो सकता है. हालांकि, वैज्ञानिक तौर पर इन दावों की पुष्टि नहीं की जा सकती है. फिर भी जो चलन में हो वो जानना चाहिए…

नाभि में तेल डालना सिर्फ दादी–नानी का नुस्खा नहीं, बल्कि शरीर और त्वचा के लिए एक प्राकृतिक उपाय है. सरसों का तेल शरीर को गर्म तासीर देता है. ठंड के मौसम में हल्की मालिश से पेट में आराम महसूस हो सकता है. कुछ लोगों को गैस और सूजन में राहत मिलती है, लेकिन यह व्यक्ति की प्रकृति पर निर्भर करता है. तेल की 2-3 बूंदें नाभि में डालकर हल्के हाथों से घड़ी की दिशा में मालिश करें.

नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं और नारियल तेल त्वचा को मॉइस्चराइज करता है. अगर किसी को त्वचा संबंधी समस्या या मुंहासे की शिकायत है तो शरीर की ठंडक बनाए रखने में ये तेल सहायक हो सकते हैं. संवेदनशील त्वचा वालों के लिए नारियल तेल ज्यादा सौम्य माना जाता है.
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अरंडी का तेल अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है. हल्की मालिश से मांसपेशियों की जकड़न या पेट के आसपास की अकड़न में आराम मिल सकता है. इसे रात में सोने से पहले कम मात्रा में लगाना बेहतर रहता है.

बादाम तेल पोषक तत्वों से भरपूर होता है. नाभि में इसकी हल्की मालिश से मन शांत महसूस कर सकता है, जिससे नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है. तनाव और थकान महसूस करने वालों के लिए यह विकल्प अच्छा माना जाता है.

दादी–नानी के अनुसार नाभि को शरीर का केंद्र माना जाता है, गर्भावस्था के समय यहीं से शिशु को पोषण मिलता है, इसलिए बुजुर्गों का मानना रहा है कि नाभि शरीर के कई हिस्सों से जुड़ी होती है. देसी घी को आयुर्वेद में स्निग्ध और पोषण देने वाला माना गया है. नाभि पर 1-2 बूंद घी लगाने से त्वचा की रूखापन कम हो सकता है. कुछ लोगों को मानसिक सुकून भी मिलता है.

रात को सोने से पहले नाभि को साफ कर लें. फिर 2-3 बूंद तेल या घी डालें. 5 मिनट तक हल्के हाथों से मालिश करें. किसी भी तरह की एलर्जी या त्वचा पर रिएक्शन हो तो तुरंत बंद करें. डॉ. अनिल पटेल की सलाह है कि नाभि में तेल लगाना एक पारंपरिक और सहायक तरीका हो सकता है, लेकिन इसे दवा का विकल्प न मानें. अगर गैस, सूजन, हार्मोनल समस्या या त्वचा रोग लंबे समय से हैं तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें.
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