हरभजन ने कोहली को श्रेय देते हुए कहा कि उन्होंने खिलाड़ियों को लगातार यह कहकर जीत का आत्मविश्वास जगाया कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने धोनी और कोहली की कप्तानी का अंतर भी बताया है।
धोनी और कोहली की कप्तानी में अंतर बताया
हरभजन सिंह ने पीटीआई से बातचीत में कहा, ”विराट कोहली ने एक बार कुछ बहुत जरूरी बात कही थी। जब हम 2010-11 में ऑस्ट्रेलिया में थे और काफी रन बनाए। लोग पूछते हैं कि क्या बदला है। धोनी ने उसे कप्तानी दी और लोग जानना चाहते थे कि धोनी और कोहली की कप्तानी में अंतर क्या था। विराट काफी साधारण बदलाव लाए और वह उनकी मानसिकता थी। यह बदलाव सबसे पहले विराट कोहली 2014-15 में कप्तान बनने के बाद लाए थे। उससे पहले हम यह नहीं सोचते थे कि हम आखिरी दिन 400 रन का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। विराट ने अपने साथियों से कहा, ‘चलो कम से कम कोशिश तो करते हैं। हम हार सकते हैं, लेकिन अगर हम कोशिश करते रहेंगे तो एक दिन हम आखिरी पारी में 400 से अधिक रन जरूर बना लेंगे।”
फिटनेस क्रांति लाने का श्रेय कोहली को जाता है
हरभजन ने कहा, ”अगर हमें आखिरी दिन 10 विकेट लेने हों, तो हम इसके लिए पूरी कोशिश करेंगे। जीतने की मानसिकता और ड्रॉ से संतुष्ट न होने का जज़्बा विराट कोहली में है।” उन्होंने कहा, ”लेकिन उनका सबसे बड़ा योगदान फिटनेस संस्कृति को बढ़ावा देना था। फिटनेस क्रांति लाने का 90 प्रतिशत श्रेय कोहली को जाता है। फिटनेस के बारे में मेरी धारणा सहनशक्ति थी, लेकिन विराट ने इस टीम को यह विश्वास दिलाया कि अगर आप फिट हैं, तो आप हवा में उड़ सकते हैं। हर कोई बैटिंग और बॉलिंग करना जानता है, लेकिन मैदान पर आप क्या करते हैं, यह भी मायने रखता है। आप अपनी टीम के लिए रन बचा सकते हैं, और यहीं आपकी प्रतिबद्धता और फिटनेस दिखाई देनी चाहिए।”
हरभजन ने आधिकारिक तौर पर दिसंबर 2021 में संन्यास लिया, लेकिन उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच 2015 में गॉल में श्रीलंका के खिलाफ खेला था, जहां दिनेश चांदीमल ने उनकी गेंद की जमकर धुनाई की थी जिससे उन्हें अहसास हुआ कि शायद लाल गेंद के क्रिकेट को अलविदा कहने का समय आ गया है।
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