हम आपको बता दें कि हमजा बुरहान को भारत सरकार ने वर्ष 2022 में आतंकवादी घोषित किया था। सरकारी अधिसूचना के अनुसार उसका वास्तविक नाम अर्जुमंद गुलजार डार था, जबकि वह हमजा बुरहान और डॉक्टर जैसे उपनामों से भी जाना जाता था। वह पुलवामा जिले के खरबतपोरा रत्नीपोरा का निवासी था और अल बद्र नामक आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह पुलवामा हमले की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाने वालों में शामिल था।
साल 2019 में जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर लेथपोरा क्षेत्र में हुआ पुलवामा आतंकी हमला देश के सबसे भीषण आतंकवादी हमलों में से एक था। जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती आतंकी आदिल अहमद डार ने विस्फोटकों से भरे वाहन को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले से टकरा दिया था। इस हमले में चालीस जवान शहीद हो गए थे। घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था और भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए जबरदस्त एअर स्ट्राइक की थी।
इसी बीच, राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी द्वारा दाखिल आरोप पत्र में कहा गया है कि इस हमले की पूरी साजिश पाकिस्तान में रची गई थी और इसका संचालन भी वहीं से किया गया। पहलगाम के बैसरन घाटी क्षेत्र में हुए इस हमले में छब्बीस पर्यटकों की जान चली गई थी। यह हमला जम्मू-कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र पर बड़ा आघात माना गया था।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अनुसार लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने मिलकर इस हमले को अंजाम दिया। जांच में सामने आया कि सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ लंगड़ा नामक आतंकी पाकिस्तान के लाहौर से पूरे अभियान का संचालन कर रहा था। वह लगातार आतंकियों को निर्देश दे रहा था और हमले के दिन वास्तविक समय की सूचनाएं तथा स्थान संबंधी जानकारी भेज रहा था।
आरोप पत्र के अनुसार सैफुल्लाह ने हमले से पहले फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी नामक आतंकियों को बैसरन घाटी और आसपास के इलाकों की रेकी के लिए भेजा था। इन आतंकियों ने वहां की सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटकों की गतिविधियों का अध्ययन किया। इसके बाद हमले के दिन लाहौर से लगातार संपर्क बनाए रखते हुए आतंकियों को आगे की रणनीति बताई गई।
जांच एजेंसी ने यह भी खुलासा किया कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों ने दुनिया को गुमराह करने के लिए झूठा प्रचार अभियान चलाया। हमले के तुरंत बाद द रेजिस्टेंस फ्रंट ने टेलीग्राम चैनल के माध्यम से जिम्मेदारी ली थी, लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना बढ़ी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हमले की निंदा की, तब संगठन ने पलटी मारते हुए दावा किया कि उसका चैनल हैक कर लिया गया था।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी की तकनीकी जांच में सामने आया कि कश्मीर फाइट नामक टेलीग्राम चैनल पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के बटाग्राम क्षेत्र से संचालित हो रहा था, जबकि दूसरा चैनल रावलपिंडी से चलाया जा रहा था। जांच एजेंसी का कहना है कि यह पूरा झूठा प्रचार अभियान पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों द्वारा रचा गया ताकि दुनिया को भ्रमित किया जा सके।
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जांच में यह भी पता चला कि मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के पास से मिले दो मोबाइल फोन पाकिस्तान से खरीदे गए थे। एक फोन लाहौर के कायदे आजम औद्योगिक क्षेत्र के पते पर भेजा गया था, जबकि दूसरा कराची के शाहरा इलाके से खरीदा गया था। इससे पाकिस्तान की प्रत्यक्ष संलिप्तता के प्रमाण और मजबूत हुए हैं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर परवेज और बशीर अहमद नामक दो लोगों ने पाकिस्तान से आए आतंकियों की मदद की थी। उन्होंने आतंकियों को ठिकाने और भागने के रास्ते उपलब्ध कराए।
हम आपको याद दिला दें कि पहलगाम हमले के बाद भारत ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान के तहत भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी ठिकानों और सैन्य ढांचे को निशाना बनाया। सटीक निर्देशित बमों, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों की मदद से लश्कर ए तैयबा के कई आतंकी प्रक्षेपण केंद्र नष्ट कर दिए गए। इसके अलावा ब्रह्मोस मिसाइलों के जरिए पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया।
देखा जाये तो इन घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवाद को पाकिस्तान से लगातार समर्थन और संरक्षण मिलता रहा है। भारत की जांच एजेंसियां और सुरक्षा बल अब आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को उजागर करने और उसे समाप्त करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहे हैं।
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