बॉलीवुड एक्ट्रेस गुल पनाग ने सोशल मीडिया पर यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक पोस्ट की आलोचना की है। ध्रुव राठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक पोस्ट लिखा था, जिसमें उन्होंने पीएम को विदेशी धरती पर शर्मिंदा करने की बात कही थी। इस पर जवाब देते हुए गुल पनाग ने कहा कि सरकार से असहमत होना और विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विदेश में देश के प्रधानमंत्री और उनके पद का मजाक बनाना ठीक नहीं है। एक्ट्रेस के मुताबिक, ऐसा करने से देश की संस्थाएं और खुद भारतीय कमजोर होते हैं। ध्रुव राठी ने लिखा- मोदी को शर्मिंदा करें
यूट्यूबर ध्रुव राठी ने 19 मई को एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि मोदी जहां भी जाएं, उन्हें हर जगह शर्मिंदा किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री बनने के बाद पिछले 12 साल में उन्होंने एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है। ध्रुव राठी ने आगे लिखा कि वे दूसरे देशों के विदेशी पत्रकारों से भी कहेंगे कि वे पीएम मोदी से जहां भी मिलें, उनसे सवाल जरूर पूछें। उन्हें लोगों के सामने जवाब देने के लिए मजबूर करें। ध्रुव राठी के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई थी। पत्रकार के वीडियो के बाद शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के बाद शुरू हुआ। ओस्लो में नॉर्वे की पत्रकार हेले लेंग ने प्रधानमंत्री से भारत में मानवाधिकारों और लोकतंत्र को लेकर सवाल पूछने की कोशिश की थी। इस दौरान पीएम मोदी बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए थे। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया था, जिसके बाद ध्रुव राठी ने पत्रकार के समर्थन में यह पोस्ट लिखा था। विरोध करना अलग, लेकिन यह तरीका सही नहीं
ध्रुव राठी के इस पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए गुल पनाग ने लिखा कि आप किसी प्रधानमंत्री को नापसंद कर सकते हैं, सरकार से असहमत हो सकते हैं, डिबेट कर सकते हैं और अलग तरह से वोट कर सकते हैं। यही लोकतंत्र है। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री के ऑफिस और विदेश में वे जिसे रिप्रेजेंट करते हैं, उसका विदेशी धरती पर मजाक बनाना सही नहीं है। यह विरोध का सही तरीका नहीं है, बल्कि इससे हमारा ही नुकसान होता है। राजनीति में भी सक्रिय रह चुकी हैं एक्ट्रेस
गुल पनाग एक्टिंग के साथ-साथ राजनीति और सामाजिक कार्यों से भी जुड़ी रही हैं। साल 2014 के आम चुनाव में उन्होंने चंडीगढ़ लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जहां वे तीसरे स्थान पर रही थीं। बाद में उन्होंने खुद को राजनीतिक गतिविधियों से अलग कर लिया और जून 2021 में आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वे एक एनजीओ भी चलाती हैं जो शिक्षा और लैंगिक समानता के लिए काम करता है।
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