फीफा इन दिनों अपने एक बड़े फैसले को लेकर चर्चा में है। विश्व कप के कमर्शियल अधिकारों से जुड़ी विवादित योजना वापस लेने के बाद संगठन के भीतर उठे सवालों के बीच अब फीफा लीडरशिप ने अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो के प्रति अपना पूरा समर्थन दोबारा व्यक्त किया है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी साफ कर दिया है कि विश्व फुटबॉल के प्रमुख संगठनों के बीच मतभेद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, मोरक्को की राजधानी रबात में बुधवार को फीफा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ऐसे समय बुलाई गई, जब यूरोपीय फुटबॉल महासंघ और अन्य महाद्वीपीय संगठनों के बढ़ते दबाव के कारण जियानी इन्फैन्टिनो के नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे थे। माना जा रहा था कि यदि विवाद और बढ़ता तो अगले वर्ष मार्च में होने वाली फीफा कांग्रेस में उनके चौथे कार्यकाल की राह भी मुश्किल हो सकती थी।
बैठक के बाद जारी बयान में फीफा ने कहा कि महासचिव मैटियास ग्राफस्ट्रॉम और संगठन के प्रबंधन मंडल के सदस्यों ने जियानी इन्फैन्टिनो के नेतृत्व पर पूरा भरोसा जताया है। बयान में यह भी कहा गया कि इन्फैन्टिनो ही ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें फीफा के 211 सदस्य देशों के फुटबॉल संघों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से चुना है। वहीं इन्फैन्टिनो ने भी महासचिव मैटियास ग्राफस्ट्रॉम और प्रशासनिक टीम के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
बता दें कि हाल ही में फीफा ने विश्व कप और अन्य प्रमुख प्रतियोगिताओं के कमर्शियल अधिकारों में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी निजी निवेशकों को बेचने का प्रस्ताव रखा था। इस योजना के जरिए लगभग 4.2 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने की तैयारी थी। हालांकि इस प्रस्ताव का कई प्रमुख फुटबॉल संगठनों ने विरोध किया। विवाद इसलिए भी बढ़ा क्योंकि इस योजना से जुड़ी एक कंपनी का संबंध अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार से जुड़ा बताया गया।
गौरतलब है कि बढ़ते विरोध के बाद फीफा को यह प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। संगठन ने स्वीकार किया कि इस पूरे मामले में कुछ गलतियां हुईं। फीफा के अनुसार, प्रबंधन परिषद और सदस्य संघों को अलग से पत्र भेजकर खेद भी व्यक्त किया गया है। साथ ही पूरे मामले की समीक्षा कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, फीफा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपनी साख और निष्पक्षता पर किसी भी तरह के सवाल को हल्के में नहीं लेगा। संगठन ने कहा कि अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जाएंगे।
इस विवाद के दौरान यूरोपीय फुटबॉल महासंघ ने सबसे कड़ा रुख अपनाया। संगठन ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उसे जियानी इन्फैन्टिनो के नेतृत्व पर पहले जैसा भरोसा नहीं रहा। इतना ही नहीं, उसने फीफा को कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा दस्तावेज सुरक्षित रखने का औपचारिक नोटिस भी भेजा। दूसरी ओर जियानी इन्फैन्टिनो के वरिष्ठ सलाहकार कार्लोस कोर्डेरो ने विरोध स्वरूप अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं इंग्लैंड के क्लब आर्सेनल के पूर्व प्रबंधक और मौजूदा फीफा अधिकारी आर्सेन वेंगर ने भी इस विवादित योजना से खुद को अलग बताया।
कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि यूरोपीय फुटबॉल महासंघ, उत्तर और मध्य अमेरिका फुटबॉल महासंघ तथा एशियाई फुटबॉल महासंघ जरूरत पड़ने पर फीफा के खिलाफ संयुक्त कदम उठाने या वैकल्पिक प्रतियोगिताओं पर भी विचार कर रहे थे। हालांकि कतर और अफ्रीका के कई फुटबॉल संघों ने जियानी इन्फैन्टिनो के समर्थन में खुलकर अपनी राय रखी है। ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फीफा अपने सदस्य देशों के बीच भरोसा दोबारा मजबूत करने और संगठन में पैदा हुए मतभेदों को किस तरह दूर करता है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.