कीर्ति आजाद के बयान पर गौतम गंभीर | Image:
ANI, X
8 मार्च को भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए टी-20 वर्ल्ड के फाइनल मुकाबले में जीत दर्ज कर टीम इंडिया ने ट्रॉफी अपने नाम की। खिताब जीतने के बाद कुछ घंटों बाद ही कप्तान सूर्यकुमार यादव ट्रॉफी के साथ अहमदाबाद के हनुमान मंदिर पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ ICC चेयरमैन जय शाह और गौतम गंभीर भी मौजूद रहे। इस पर ही TMC सांसद कीर्ति आजाद ने सवाल उठाए।
कीर्ति आजाद के बयान पर क्या बोले गौतम गंभीर?
सांसद के बयान पर कोच गौतम गंभीर ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि मुझे लगता है कि इस सवाल का जवाब देना भी बेकार है। यह पूरे देश के लिए एक बड़ा पल है। विश्व कप जीत का जश्न मनाना जरूरी है। कुछ बयान देने का जवाब कोई मतलब नहीं है क्योंकि ये आपकी उपलब्धि को कमतर ही करेंगे।
गंभीर ने आगे कहा कि अगर आप उन 15 खिलाड़ियों की उपलब्धियों और उनके प्रयासों को कमतर आंकना चाहते हैं, तो यह उनके साथ नाइंसाफी होगी। सोचिए उन खिलाड़ियों ने कितना कुछ झेला है। साउथ अफ्रीका में मैच हारने के बाद उन पर कितना दबाव था। आज अगर आप ऐसा बयान देते हैं, तो आप सचमुच अपने खिलाड़ियों और अपनी ही टीम का अपमान कर रहे हैं, जो नहीं होना चाहिए।
कीर्ति आजाद ने कहा- टीम इंडियो को शर्म आनी चाहिए
टीम इंडिया के वर्ल्ड कप का खिताब जीतने के बाद जहां पूरा देश जश्न में डूबा था। इस बीच सांसद कीर्ति आजाद ने अपने बयान से नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि टीम इंडिया को शर्म आनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब हमने 1983 में कपिल देव की लीडरशिप में वर्ल्ड कप जीता था, तो टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई थे। हम ट्रॉफी अपने धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि इंडिया, भारत (हिंदुस्तान) लाए थे। अब भारतीय क्रिकेट की ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं?
सांसद ने आगे कहा कि यह टीम इंडिया को रिप्रेजेंट करती है- सूर्य कुमार यादव या जय शाह के परिवार को नहीं। सिराज कभी इसे मस्जिद नहीं लेकर गए। संजू इसे कभी चर्च नहीं लेकर गए। उन्होंने इसमें अहम रोल निभाया और वह मैन ऑफ द टूर्नामेंट बने।यह ट्रॉफी हर धर्म के 1.4 बिलियन भारतीयों की है, किसी एक धर्म की जीत का प्रतीक नहीं।’
मुझे उनसे यह उम्मीद नहीं थी- हरभजन सिंह
इससे पहले कीर्ति आजाद के बयान पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह की भी प्रतिक्रिया आई थी। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का ट्रॉफी मंदिर ले जाना पॉलिटिक्स करना अजीब है। कीर्ति आजाद खुद एक पुराने क्रिकेटर हैं। मुझे उनसे यह उम्मीद नहीं थी। शायद पॉलिटिक्स ने उन्हें प्रायोरिटी दे दी है और वह भूल गए हैं कि वह एक स्पोर्ट्समैन हैं।
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