मिल्वॉकी (अमेरिका), दो अक्टूबर (एपी) जी20 देशों के व्यापार मंत्रियों ने बृहस्पतिवार को बाजारों में जरूरत से अधिक उत्पादन और कम कीमत वाले सामान की भरमार को रोकने के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इससे अमेरिकी विनिर्माताओं को नुकसान हो रहा है। बैठक से बाहर निकलते हुए अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि जरूरत से अधिक उत्पाद की समस्या पर आम सहमति नहीं बनने के बावजूद बातचीत रचनात्मक रही।
ग्रीर ने कहा, ‘‘लगभग सभी देशों ने माना कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर कार्रवाई की जरूरत है। साथ ही इस समस्या से निपटने के लिए व्यापार में सुधारात्मक उपायों और जवाब देने की हमारी मौजूदा व्यवस्था अपर्याप्त है।’’
अमेरिका ने व्यापारिक साझेदारों पर मांग से अधिक मात्रा में कई तरह के सामान का उत्पादन करने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि इससे कीमतें नीचे आती हैं और प्रतिस्पर्धा का संतुलन अनुचित रूप से बिगड़ता है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन चीन को इसका सबसे बड़ा दोषी मानता है, लेकिन उसने नॉर्वे से लेकर बांग्लादेश तक के देशों के खिलाफ जांच शुरू की है। चीन में बने इस्पात के अलावा प्रशासन का कहना है कि वाहन, बैटरी, कागज और सेमीकंडक्टर समेत कई उद्योगों में जरूरत से अधिक उत्पादन की समस्या रही है जिससे अमेरिका अपने प्रतिस्पर्धियों से पिछड़ रहा है। जी20 के प्रतिनिधियों की मिल्वॉकी में हुई बैठक में अमेरिका और कनाडा के बीच जारी सबसे बड़े व्यापार विवाद में किसी बड़ी सफलता के संकेत नहीं मिले।
गर्मियों के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है। ट्रंप ने करीब 20 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के कनाडा के आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है जिसके जवाब में कनाडा ने भी तत्काल अपने शुल्क लगा दिए। इस सप्ताह स्थिति और बिगड़ गई, जब ट्रंप ने करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के कनाडा के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया जिसमें मादक पेय, डेयरी उत्पाद और मोटरसाइकिल शामिल हैं।
ग्रीर ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘हकीकत यह है कि कुछ ऐसे मुद्दे अब भी लंबित हैं, जिनका समाधान करना काफी मुश्किल है।’’
वहीं कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने सहयोग की अपील करते हुए कहा, ‘‘आपके सामने भी उन्हीं में से कुछ चुनौतियां हैं, जिनका हम सामना कर रहे हैं। आइए, एक-दूसरे की मदद करें और मिलकर इसका समाधान निकालें।’’
बैठक में नेता बंधुआ मजदूरी के मुद्दे पर भी समझौते पर नहीं पहुंच सके। ट्रंप प्रशासन ने 60 से अधिक देशों पर दोहरे अंक वाले शुल्क लगाने के औचित्य के रूप में इस उपाय का इस्तेमाल किया है।
ये शुल्क अमेरिका के 99 प्रतिशत आयात को प्रभावित करते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि इसके पीछे एक और मकसद – दुनियाभर के आयात पर पिछले साल लगाए गए ट्रंप के शुल्क की जगह नई व्यवस्था लाना है। ग्रीर ने कहा, ‘‘यकीन करना मुश्किल है, लेकिन जी20 में ऐसे देश हैं जो बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने के लिए प्रतिबद्ध नहीं होना चाहते। अंतत: हम सभी जानते हैं कि बंधुआ मजदूरी गलत है और इससे हमारे बाजारों में स्थिति बिगड़ेगी तथा हम इसे नहीं होने देंगे।
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