जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के छोटे से गांव अश्मुजी में पले-बढ़े राशिख सलाम डार की क्रिकेट यात्रा बेहद साधारण माहौल से शुरू हुई थी। मौजूद जानकारी के अनुसार क्रिकेट से उनका परिचय उनके चचेरे भाई नदीम डार ने कराया था। बचपन में टेनिस गेंद से खेलते हुए राशिख ने कई तरह की गेंदबाजी सीखी। बाद में जब उन्होंने चमड़े की गेंद से खेलना शुरू किया तो उनकी स्विंग गेंदबाजी ने स्थानीय क्रिकेट में पहचान दिलानी शुरू कर दी थी।
गौरतलब है कि राशिख का करियर 2019 में बड़े संकट में आ गया था। जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े एक विवाद के कारण उन पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया गया। इस प्रतिबंध के कारण वह अंडर-19 विश्व कप से बाहर हो गए और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट में वापसी के रास्ते भी लगभग बंद हो गए थे। यह उनके करियर का सबसे कठिन दौर माना जाता है।
हालांकि मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। प्रतिबंध समाप्त होने के बाद मुंबई में अभ्यास के दौरान उन्हें कमर में गंभीर चोट लग गई। इस वजह से वह लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहे। बता दें कि लगभग चार वर्षों तक राशिख कोई बड़ा प्रतिस्पर्धी मुकाबला नहीं खेल पाए, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
उनके करीबी मित्र मीर मुर्तजा के अनुसार राशिख स्वभाव से बेहद शांत हैं, लेकिन मानसिक रूप से काफी मजबूत खिलाड़ी हैं। कई बार असफलताओं और चयन में निराशा मिलने के बावजूद उन्होंने क्रिकेट छोड़ने के बारे में कभी नहीं सोचा। उनका सपना हमेशा भारत के लिए खेलना रहा है।
आईपीएल 2025 की नीलामी में जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने राशिख सलाम डार को छह करोड़ रुपये में खरीदा तो कई लोगों ने इस फैसले पर सवाल उठाए थे। उस समय उनके नाम केवल कुछ ही आईपीएल मुकाबले और एक विकेट दर्ज था। लेकिन राशिख ने आलोचनाओं का जवाब मैदान पर दिया।
आईपीएल 2026 में उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 19 विकेट हासिल किए। फाइनल मुकाबले में गुजरात टाइटंस के खिलाफ वह बेंगलुरु के सबसे सफल गेंदबाज रहे और 27 रन देकर तीन महत्वपूर्ण विकेट लिए। उनकी धीमी गेंदें, यॉर्कर और विविधता ने विपक्षी बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के कप्तान रजत पाटीदार ने भी राशिख की जमकर तारीफ की। पाटीदार के अनुसार राशिख अपनी भूमिका को लेकर पूरी तरह स्पष्ट रहते हैं और दबाव के समय टीम को महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाने की क्षमता रखते हैं।
खिताब जीतने के बाद भावुक राशिख ने इस सफलता को अपने पिता अब्दुल सलाम को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने कभी उन्हें क्रिकेट खेलने से नहीं रोका और हर कठिन समय में उनका साथ दिया।
अब जबकि भारतीय टीम अगले दो वर्षों में कई टी-20 मुकाबले खेलने वाली है, क्रिकेट जानकार मानते हैं कि राशिख सलाम डार ने राष्ट्रीय टीम के दरवाजे पर मजबूत दस्तक दे दी है। यदि वह फिट रहते हैं और इसी तरह प्रदर्शन जारी रखते हैं तो जल्द ही भारतीय टीम की नीली जर्सी में उन्हें देखना कोई बड़ी बात नहीं होगी।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.